माता-पिता की सेवा का परिणाम – Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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माता-पिता की सेवा का परिणाम

 :-माता-पिता की सेवा से लाभ:-

सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी ने अनेक रचना के बाद जब मानव की रचना की तो उन्हें सुखद अनुभूति हुयी,क्यूँकि मानव को बुद्धि और विवेकशील प्राणी बनाया और वह अपने बुद्धि विवेक से मानव योनि की रचना को उनके भाव के अनुसार साकार कर सकता है।

मानव इस धरा पर माता और पिता की कृपा से आया। माता ने अपने कुक्षि में जीव को ९ महीने तक रखकर तमाम प्रकार की असह्य वेदना को सहकर इस योनि की प्राप्ति करायी।

शास्त्र में माता और पिता की इसी कृपा के कारण उनको देवता कहा गया।क्यूँकि मानव योनि हीं हमको परमात्मा की प्राप्ति और मोक्ष का द्वार प्रशस्त करती है।

शास्त्रों में मातृ देवो भव,पितृ देवो भव उसके बाद हीं किसी को स्थान प्रदान किया गया है। इसलिये हम समस्त जीवों को यह परम दायित्व बनता है कि अपने जन्मदाता के प्रति हमारा उत्तरदायित्व प्रथम रहे।

जिन माता-पिता ने अपनी क्षमता के इतर हमको पाल-पोस कर हमें खड़ा करने का प्रयास किया उन देव रुपी माता-पिता की सेवा रुपी वन्दना के बाद हीं किसी अन्य की वन्दना करें।

मनुष्य स्वार्थी है जैसा कि तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में लिखा,सुर नर मुनि सबकी यह रीती ,स्वारथ लाग करै सब प्रीती। हर कार्य में क्या स्वार्थ सिद्ध होगा जानकर हीं कार्य करना चाहता है।

आइये हम यह भी जान लेते है कि माता-पिता की सेवा से क्या लाभ प्राप्त होता है।

तुलसीदास जी ने हीं माता-पिता की सेवा से क्या लाभ मिलता है ,बताते हुये लिखा कि-

“चारि पदारथ करतल ताके,प्रिय पितु मातु प्राण सम जाके” अर्थात जिनके लिये माता और पिता जिस प्रकार प्राण प्रिय होता है उसी प्रकार प्रिय  हो तो उनके जीवन में संसार की समस्त वस्तुयें उनके प्रभाव में रहेगी।

चारि पदारथ का अभिप्राय यह है कि धर्म अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति। जिसका सबसे सुगम मार्ग माता-पिता की सेवा है।

प्रभु माता-पिता की चरणों की सेवा करने में आप और हम सभी को अनुराग प्रदान करें ऐसी शुभकामना आप सभी को प्रेषित करता हूँ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ………………

 

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