शुक्र का मीन राशि में गोचर 17-मार्च-2021 - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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शुक्र का मीन राशि में गोचर 17-मार्च-2021

ज्योतिषचक्रे तु लोकस्य सर्वस्योक्तम शुभाशुभम।
ज्योतिर्ज्ञानम तु यो वेद स याति परमां गतिम॥

अर्थात लोक में शुभ और अशुभ की बात कहना केवल ज्योतिष से हीं संभव है,वेद रूपी इस ज्योति ज्ञान की प्राप्ति वाले को परम गति की प्राप्ति होती है।
भृगु गोत्र के ब्राह्मण,कमल पर आसीन,श्वेत वर्ण वाले,चार हाथ वाले रुद्राक्ष,वर मुद्रा,शिला और दण्ड जिनके चारों हाथों में है,ऐसे शुक्र का दिनाँक 17-3-2021 को मीन राशि में प्रवेश हो रहा है जिसे हम “शुक्र का मीन राशि में गोचर” की संज्ञा देते हैं।

गोचरे वा विलग्ने वा ये ग्रहारिष्टसूचका:।
पूजयेत्तान प्रयत्नेन पूजिता: स्युः शुभप्रदा:॥

अर्थात गोचर में जो ग्रह अरिष्टकारक हों,उनको प्रसन्न करने का प्रयत्न करना चाहिये।प्रसन्न होकर वे ग्रह शुभफलप्रद हो जाते हैं।शुक्र का मीन राशि में संचार 17-3-2021 को हो रहा है, और यह 10-04-2021 तक इस राशि मे रहेगा |आइये जानते है कि विभिन्न राशियों के लिए शुक्र का मीन राशि में संचार क्या फल प्रदान करेगा।

 

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष– मेष राशि एवं लग्न वाले जातको  के लिए द्वितीयेश एवं सप्तमेश शुक्र की गोचर  से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में जातक को धन धान्य का उत्तम सुख प्राप्त होगा। भोग विलास में व्यय होगा। भौतिकवाद के विचारधारा में वृद्धि होगी। भोग विलास में समय व्यतीत होगा। बाहरी स्थान के सहयोग से या बाहरी स्थान से व्यवसाय में वृद्धि होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे तथा शत्रुओं से भी धन की प्राप्ति होगी।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। निर्माणकारी कार्य एवं मांगलिक कार्यों में व्यय होगा। धार्मिक यात्रा भी हो सकती है।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में नौकरी के क्षेत्र तथा सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। राजकोष से भी आय में वृद्धि होगी। बड़े भाई का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। छोटे भाई बहन एवं मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। साझेदारी के व्यवसाय में लाभ मिलेगा। संचित धन में वृद्धि होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। बंधु बंधुओं का सुख प्राप्त होगा।

 

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष– वृष राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए लग्नेश एवं षष्ठेश शुक्र की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में सभी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। आय में वृद्धि होगी। स्वादिष्ट व्यंजन की प्राप्ति होगी। विद्या के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। चाचा, बुआ, मामा, मौसी आदि से भी संबंध मधुर रहेंगे तथा इनका सानिध्य प्राप्त होगा। स्त्रियों से मित्रता बढ़ेगी तथा इनका सहयोग मिलेगा। जिसके प्रभाव से मन प्रसन्न रहेगा।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आकस्मिक धन लाभ हो सकता है। आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। नौकरी के क्षेत्र में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। स्त्री वर्ग या किसी उच्च पदाधिकारी के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में वाणी एवं विद्या के प्रभाव से समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। कुटुंब के सहयोग से संचित धन में वृद्धि होगी। विद्या के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन–  मिथुन राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए व्ययेश एवं पंचमेश शुक्र की गोचर दशम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में आलस्य की अधिकता के कारण कार्य में हानि हो सकती है। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। बाहरी  स्थान के द्वारा मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। संतान से वैचारिक मतभेद हो सकता है। नौकरी में तथा कार्यक्षेत्र में विघ्न बाधाएं आ सकती हैं। व्यय की अधिकता के कारण आर्थिक परेशानी हो सकती है। दांपत्य जीवन में भी कलह हो सकता है।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मान सम्मान में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी तथा मन प्रसन्न रहेगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में मानसिक कष्ट हो सकता है। कार्य में रूकावट आ सकती है। अधीनस्थ कर्मचारी या मजदूर वर्ग के असहयोग के कारण धन हानि हो सकती है। परिश्रम के अनुसार फल की प्राप्ति होगी।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। भूमि वाहन आदि में अपव्यय हो सकता है। अतः वाहन आदि में सोच समझकर निवेश करें। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क–  कर्क लग्न एवं राशि वाले जातको के लिए आयेश एवं चतुर्थेश शुक्र की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। मित्र एवं बंधु बांधवों का सुख एवं सानिध्य प्राप्त होगा। पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन एवं मकान आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। परिवार में मांगलिक एवं धार्मिक कार्य होंगे। नौकरी के क्षेत्र में चिर स्थाई लाभ होगा। उत्तम वस्त्र एवं आभूषण की प्राप्ति होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में शत्रुओ के द्वारा भी सम्मान प्राप्त होगा अर्थात शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे। चाचा बुआ मामा मौसी से सहयोग प्राप्त होगा। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिसके प्रभाव से कार्य में सफलता सहज ही प्राप्त होगी।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में स्त्री वर्ग के सहयोग से समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। यात्रा भी हो सकती है। आकस्मिक धन लाभ या हानि भी हो सकती है।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में बाहरी स्थान का सहयोग प्राप्त होगा। भोग विलास में व्यय हो सकता है। पराक्रम में वृद्धि होगी। छोटे भाई बहन एवं मित्रों का सुख प्राप्त होगा तथा भाग्य की वृद्धि में सहायक सिद्ध होंगे।

मा, मी, मू, मे मो, टा, टी, टू, टे

सिंह–  सिंह राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए दशमेश एवं तृतीयेश शुक्र की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी। परिवार एवं कुटुंब का सुख प्राप्त होगा। वाणी में मधुरता रहेगी। वाणी के प्रभाव से समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा। विद्या के क्षेत्र में भी मनवांछित सफलता प्राप्त होगी। शरीर स्वस्थ रहेगा तथा सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होगा। भोग विलास की सामग्री में वृद्धि होगी। छोटे भाई बहन एवं मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा तथा प्रेम व्यवहार में वृद्धि होगी।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेंगे। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आकस्मिक धन प्राप्ति हो सकती है या पहले का दिया हुआ धन प्राप्त हो सकता है। संचित धन की वृद्धि में कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा। संतान सुख की प्राप्ति होगी तथा विद्या में सफलता प्राप्त होगी।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में व्यवसाय के द्वारा आय में वृद्धि होगी। स्त्री वर्ग के सहयोग से संचित धन में वृद्धि होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में विभिन्न स्रोत से आय की प्राप्ति होगी। साझेदारी के व्यवसाय में भी वृद्धि होगी तथा आय की प्राप्ति होगी। वाणी एवं बुद्धि के प्रभाव से समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। बड़े भाई का भी सुख एवं प्रेम प्राप्त होगा।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या–  कन्या राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए नवमेश एवं धनेश शुक्र की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में आलस्य के कारण कार्य में हानि हो सकती है। दांपत्य जीवन में कटुता रहेगी। जीवनसाथी को गुप्त इंद्रियों से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। यात्रा का भी योग बन रहा है। यात्रा में हानि हो सकती है। अनैतिक संबंध अर्थात किसी अन्य स्त्री से प्रेम संबंध के कारण समाज में अपमान हो सकता है। मधुमेह, गुप्तेन्द्रियों से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में व्यवसाय में वृद्धि हो सकती है। स्त्री वर्ग के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। ससुराल पक्ष के हस्तक्षेप के कारण दांपत्य जीवन में कलह रहेगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में प्रतिस्पर्धा के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है। विद्या के क्षेत्र में मनवांछित सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। संतान से भी वैचारिक मतभेद रहेगा। शत्रुओं में वृद्धि होगी तथा संचित धन की हानि भी हो सकती है। जीवनसाथी को नस एवं हड्डी से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन अशांत रहेगा।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। स्त्री वर्ग के विरोध के कारण कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है। वाणी एवं बुद्धि के प्रभाव से विरोधियों को शांत किया जा सकता है, तथा कार्य में सफलता प्राप्त की जा सकती है। पिता का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला– तुला राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए अष्टमेश एवं लग्नेश शुक्र की गोचर से आठवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शत्रुओं में वृद्धि होगी तथा शत्रुओ के कारण धन एवं मानहानि हो सकती है। भोग विलास में अत्यधिक संलिगन्ता के कारण शारीरिक कष्ट भी हो सकता है। यात्रा में भी अपव्यय हो सकता है। इस अवधि में की गई यात्रा सुखद नहीं रहेगी। जीवनसाथी का भी स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। साझेदारी के व्यवसाय में आपसी विवाद के कारण हानि हो सकती है।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में छोटे भाई बहन एवं मित्रों से मतभेद रहेगा। मित्र भी शत्रुवत् व्यवहार करेंगे। जिसके कारण धन हानि हो सकती है। चाचा, बुआ आदि से भी विरोध का सामना करना पड़ेगा। शत्रुओं का प्रभाव बढ़ेगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में आलस्य के कारण विद्या के क्षेत्र में हानि हो सकती है। भूमि से संबंधित विवाद के कारण धन हानि हो सकती है। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। संतान से भी वैचारिक मतभेद हो सकता है।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। परंतु यात्रा में भी व्यय हो सकता है। आलस्य के कारण कार्य में हानि भी हो सकती है। अतः आलस्य से दूर रहें।

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक–  वृश्चिक राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए सप्तमेश एवं व्ययेश शुक्र की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में भोग विलास मे अधिक समय व्यतीत होगा तथा आमोद प्रमोद में व्यय होगा। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। विभागीय परीक्षा में भी सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख प्राप्त होगा। मान सम्मान में वृद्धि होगी तथा यश की प्राप्ति होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। शत्रुओं पर विजय मिलेगी।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में वाणी एवं विद्या के प्रभाव से मान मर्यादा में वृद्धि होगी। नए वस्त्र एवं आभूषण की प्राप्ति होगी। स्वादिष्ट व्यंजन की प्राप्ति होगी। विद्या के क्षेत्र में मनवांछित सफलता प्राप्त होगी। लंबी यात्रा भी हो सकती है।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में छोटे भाई बहन एवं मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। पराक्रम में वृद्धि होगी। भूमि वाहन मकान आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। साझेदारी के व्यवसाय में लाभ मिलेगा।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में आय में वृद्धि होगी। स्त्री वर्ग या जीवनसाथी के द्वारा भी धन की प्राप्ति हो सकती है।।व्यवसाय से भी आय में वृद्धि होगी। बाहरी स्थान का सहयोग प्राप्त होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु– धनु राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए आयेश एवं षष्ठेश शुक्र की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में भूमि, मकान,वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा। वैभव में वृद्धि होगी। शत्रु के द्वारा भी उपहार प्राप्त होगा। ननिहाल पक्ष का सुख एवं सानिध्य मिलेगा। सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। मनवांछित सफलता कार्यक्षेत्र में प्राप्त होगी। आय में वृद्धि होगी। जन संपर्क बढ़ेगा तथा जनता का प्रेम प्राप्त होगा। नए वाहन की प्राप्ति हो सकती है।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। भूमि एवं भूमि से संबंधित वस्तुओं से आय में वृद्धि होगी। वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। माता का सुख एवं सानिध्य मिलेगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में बंधु बंधुओं के साथ संबंध मधुर रहेंगे तथा संचित धन की वृद्धि में इनका सहयोग प्राप्त होगा। पराक्रम में वृद्धि होगी तथा नये मित्र बनेंगे।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। दांपत्य जीवन सुख में रहेगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी। माता-पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर– मकर राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए पंचमेश एवं दशमेश शुक्र की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। छोटे भाई बहन एवं मित्रों का प्रेम प्राप्त होगा। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख मिलेगा। नौकरी का सुख प्राप्त होगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। बाहरी स्थान के सहयोग से भी कार्य में सफलता मिलेगी। धार्मिक कार्य में भी व्यय हो सकता है। घर में मांगलिक कार्य होगा।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धर्म में रुचि बढ़ेगी। घर में धार्मिक एवं मांगलिक कार्य होंगे। तीर्थ यात्रा भी हो सकती है। बड़ों का आशीर्वाद एवं प्रेम प्राप्त होगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। कुटुंब का सहयोग मिलेगा। संचित धन में वृद्धि होगी। वाणी एवं पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिसके प्रभाव से कम परिश्रम से ही कार्य में सफलता मिलेगी। शत्रु पराजित होंगे। चाचा बुआ एवं मामा मौसी का प्रेम प्राप्त होगा।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-  कुम्भ राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए चतुर्थेश एवं नवमेश शुक्र की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में वाणी के प्रभाव से मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। संगीत से संबंधित लोगों के लिए समय अति उत्तम है। संचित धन में वृद्धि होगी। नए-नए वस्त्र एवं आभूषण धारण करने का अवसर प्राप्त होगा। कुटुंब का सहयोग एवं सानिध्य मिलेगा। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख प्राप्त होगा। भाग्य का पूर्ण सुख मिलेगा। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगा|

 17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धन-धान्य में वृद्धि होगी। मां सरस्वती की भी कृपा प्राप्त होगी। वाणी के प्रभाव से कार्य में सफलता मिलेगी। गायन के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का  स्वामी शनि है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। बाहरी स्थान से भी धन की प्राप्ति होगी। व्यय भी हो सकता है।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में आकस्मिक आय में वृद्धि हो सकती है। बड़े भाई का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। उदर विकार से शारीरिक कष्ट हो सकता है। वाणी एवं बुद्धि के प्रभाव से मान सम्मान प्राप्त होगा।

 

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन-  मीन राशि एवं लग्न वाले जातको के लिएतृतीयेश एवं अष्टमेश शुक्र की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में स्वास्थ्य का उत्तम सुख प्राप्त होगा। मन में दुराचार की प्रवृत्ति जागृत हो सकती है। अतः दुष्कर्म से दूरी बना कर रहे। विद्या के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख मिलेगा। विवाह आदि शुभ कर्म भी हो सकते हैं। व्यापार में भी वृद्धि होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। जलीय पदार्थ एवं सुगंधित वस्तुओं के व्यवसाय से भी धन की प्राप्ति हो सकती है। मित्रों का सुख एवं प्रेम मिलेगा। मित्रों में वृद्धि होगी।

17 मार्च से 19 मार्च तक शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त होगा तथा शरीर स्वस्थ रहेगा।

19 मार्च से 30 मार्च तक शुक्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में आय में वृद्धि होगी। परंतु व्यय भी अधिक होगा। भोग विलास में व्यय होगा। व्यय की अधिकता के कारण मन अशांत हो सकता है।

30 मार्च से 10 अप्रैल तक शुक्र रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। नए वाहन खरीदने में भी व्यय हो सकता है। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। स्त्री वर्ग का सहयोग प्राप्त होगा।

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