ब्राह्मण और उनके गुण

:-ब्राह्मण और उनके गुण:-

ब्राह्मण के उद्भव,लक्षण के सन्दर्भ में बताते हुये लिखा गया कि-

ब्रह्मवीर्यम,ब्रह्मक्षेत्रम संस्कारा ब्रह्मसम्भवा:।

ब्राह्मणाचरणाद,ब्रह्मविद्याभिर्ब्राह्मणो भवेत॥

अर्थात ब्राह्मण माता-पिता ,वैदिक संस्कारों वाला और ब्राह्मणों के निमित्त आचरणवाला,ब्रह्मविद्या का ज्ञाता ये ब्राह्मण के लक्षण हैं।

साथ हीं कहा गया कि -“ब्रह्मण्याम ब्राह्मण:”,अर्थात जन्म से हीं ब्रह्मणत्व की प्राप्ति ब्राह्मण को प्राप्त होती है।

ब्राह्मण के गुण:-       ब्राह्मण के गुण के सन्दर्भ में बताया गया कि-

रिजु: तपस्वी सन्तोषी क्षमाशीलों जितेंद्रियः।

                       दाता शूर दयालुश्च ब्राह्मणो नवभिर्गुनै: ॥”

अर्थात ब्राह्मण को सरल,तपस्वी,मेहनती और सन्तुष्ट रहने वाला,क्षमाशील,इन्द्रियनिग्रह,दान करने वाला,बहादुर और सब पर दया करने वाला होना चाहिये, ये ब्राह्मणों के गुण हैं।

 

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