सूर्य का वृष राशि में गोचर-15-मई- 2019

सूर्य सिद्धान्त के अधिष्ठाता भगवान सूर्य अपनी गत्यात्मक अवस्था में मकर राशि में प्रवेश कर रहे है।

15 मई 2019 को सूर्य वृष राशि में प्रवेश करेगा और 15 जून 2019 तक वृष राशि में रहेगा:-

भुवन भास्कर भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं उपनिषदों में भगवान सूर्य के तीन रूपों का विवेचन हुआ-
1-निर्गुण-निराकार 2-सगुण-निराकार 3-सगुण-साकार
छांदोपनिषद में सूर्य को ब्रह्म कि संज्ञा दी गयी,”आदित्यम ब्रहमेति”।
भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया कि-

“ॐ चित्रन देवानामुदगादनीकम चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्ने:।
आप्रा द्यावापृथिवी अंतरिक्षम सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च॥”
अर्थात जो तेजोमय किरणों के पुंज हैं,मित्र,वरुण तथा अग्नि आदि देवताओं एवं समस्त विश्व के प्राणियों के नेत्र हैं और स्थावर-जंगमात्मक समस्त जीवनिकाय के अन्तर्यामी आत्मा हैं,वे भगवान सूर्य आकाश,पृथिवी और अन्तरिक्ष लोक को अपने प्रकाश से पूर्ण करते हुए आश्चर्य रूप से उदित हो रहे हैं।
वशिष्ठ जी ने भी प्रार्थना करते हुए कहा कि,”जो ज्ञानियों के अंतरात्मा,जगत को प्रकाशित करने वाले,संसार के हितैषी,स्वयम्भू तथा सहस्त्र उद्दीप्त नेत्रों से सुशोभित हैं,उन अमित तेजस्वी सुर श्रेष्ठ भगवान सूर्य को नमस्कार है ।
आज संसार को प्रकाशित करने वाले तेजोमय,हितैषी, ग्रहों के राजा सूर्य वृष राशि में गमन कर रहे हैं,आइये जाने सूर्य का  वृष राशि में पारगमन  किस प्रकार के फल को प्रदान करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए पंचमेश सूर्य की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में विद्या एवं संतान के सुख में वृद्धि होगी। वाणी में कठोरता के कारण कुटुंब दिनों से विवाद हो सकता है। नेत्र विकार एवं सिर दर्द से कष्ट हो सकता है। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने से स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। लोग अपने कार्य की सिद्धि के लिए धोखा दे सकते हैं। कुटुंब में विवाद के कारण संचित धन की हानि हो सकती है।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में मित्र एवं संबंधियों से विवाद हो सकता है। व्यवसाय में भी हानि हो सकती है। शारीरिक कष्ट हो सकता है।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में बुद्धि के प्रभाव से विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। मन अशांत रहेगा। दुर्जनों से संगति हो सकती है। जिसके कारण मान-सम्मान में हानि होगी।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा एवं उष्णता उत्पन्न करने वाले रोग से कष्ट हो सकता है। जातक जिद्दी हो सकता है। यात्रा भी हो सकती है।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- वृष राशि वाले जातकों के लिए चतुर्थेश सूर्य की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में कठिन परिश्रम से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परिस्थिति मन के अनुकूल न होने से स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। मान-सम्मान में कमी आएगी। धन का अपव्यय हो सकता है। भूमि वाहन मकान आदि का सुख प्राप्त होगा परंतु मन अशांत रहेगा।। जीवनसाथी को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। संचित धन में भी हानि हो सकती है।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी परंतु स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। सिरदर्द आदि से कष्ट हो सकता है।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मित्रों का सुख एवं सहयोग प्राप्त नहीं होगा। पराक्रम में हानि होगी। साझेदारी के व्यवसाय में लाभ नहीं होगा। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। यात्रा में भी व्यय हो सकता है। क्रोध के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। व्यवसाय में हानि हो सकती है। बाहरी स्थान से भी हानि हो सकती है। बाहरी स्थान के व्यवसाय से दूरी बनाकर रखने में ही भलाई है।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- मिथुन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए तृतीयेश सूर्य की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में परिवार या कुटुंबिम्यो  से क्लेश होगा। व्यय की अधिकता रहेगी। पुरुषार्थ में कमी के कारण कार्य क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट होगा। नेत्र विकार से भी कष्ट हो सकता है। पेट में जलन आदि के कारण कष्ट हो सकता है। मित्रों के साथ मनोरंजन आदि में व्यय हो सकता है।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पराक्रम की कमी रहेगी। मित्र भी शत्रुवत व्यवहार करेंगे। मित्रों के कारण धन हानि हो सकती है। सरकारी कार्य में भी हानि की संभावना रहेगी।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। मन अशांत रहेगा तथा संचित धन की हानि हो सकती है। कुटुबिम्यो से विरोध का सामना करना पड़ेगा।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। ताप एवं उष्णता से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहेगी। दांपत्य जीवन में भी कलह रहेगा। संतान एवं स्त्री को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क-कर्क राशि एवं लग्न वालों के लिए द्वितीयेश सूर्य की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपसिथति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में नए पद या स्थान की प्राप्ति होगी। नौकरी में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। रोग से छुटकारा मिलेगा अर्थात शरीर स्वस्थ रहेगा। आय एवं संचित धन में वृद्धि होगी। उत्तम भोजन एवं नवीन वस्त्र तथा आभूषण की प्राप्ति होगी।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पिता के द्वारा या पिता के व्यवसाय से लाभ होगा। राज्य की ओर से अर्थात राजकीय कोष से भी आय की प्राप्ति होगी। उच्च पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मन प्रसन्न एवं शरीर स्वस्थ रहेगा। सातिवक कार्य में रुचि बढ़ेगी। आध्यात्मिक क्षेत्र में भी वृद्धि होगी। परिवार में मांगलिक कार्य हो सकते हैं या मांगलिक एवं धार्मिक कार्य में व्यय होगा।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। विद्या के प्रभाव से संचित धन एवं आय में वृद्धि होगी। प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। माता का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा।

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह-सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश सूर्य के गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में जिस कार्य की सिद्धि के लिए कार्य कर रहे हैं, उसमें सफलता प्राप्त होगी। बड़े से बड़े कार्य के लिए किए गए संकल्प की भी सिद्धि प्राप्त होगी अर्थात बड़े से बड़े कार्य में भी सफलता प्राप्त होगी। समाज में सम्मानित लोग तथा उच्च पदाधिकारियों से संबंध स्थापित होंगे। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। यश की प्राप्ति होगी।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र मे  रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। अपने से बड़े तथा गुरुजनों की कृपा एवं आशीर्वाद की प्राप्ति होगी। पिता के द्वारा भी आय में वृद्धि होगी। उच्च पदाधिकारियों के सहयोग से पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। मित्र एवं छोटे भाई बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। 

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगाइस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में यात्रा हो सकती है। बाहरी स्थान के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। मन प्रसन्न रहेगा।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी। भूमि वाहन मकान आदि का सुख प्राप्त होगा। भाग्य का सुख प्राप्त होगा अर्थात संकल्प मात्र से ही सफलता की प्राप्ति होगी।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या-कन्या राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए व्ययेश सूर्य की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में अपने प्रिय लोगों से विरह हो सकता है। कार्यक्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। झूठा आरोप लगने की संभावना रहेगी। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। पुण्य की हानि हो सकती है। व्यय की अधिकता रहेगी। पराक्रम में हानि होगी। कार्य क्षेत्र में बाधा उत्पन्न होगी।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रोग उत्पन्न होंगे। मन अशांत रहेगा। छोटे भाई बहन को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है  कार्य में मनोनुकूल सफलता न मिलने के कारण स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। आय के दृष्टिकोण से समय अनुकूल है परंतु सगे संबंधियों से विरोध के कारण मन अशांत रहेगा। संतान को भी कष्ट हो सकता है।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में मित्रों के असहयोग के कारण कार्य में हानि होगी। रक्त एवं हड्डी से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवन साथी का भी स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला-तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए आयेश सूर्य की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शरीर में रोग तथा मन में भय उत्पन्न होगा । उच्च पदाधिकारियों से नाराजगी हो सकती है जिसके कारण कार्य में हानि होगी। कुटुंब में कलह लड़ाई झगडा विवाद रहेगा। जिसके कारण मन में अशांति एवं चिंता बनी रहेगी। ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में आय में आक्सिमक वृद्धि हो सकती है परंतु संचित धन में हानि की संभावना रहेगी। जीवन साथी को भी ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यय की अधिकता रहेगी।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में कार्य क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने से मन अशांत रहेगा। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। सरकार की ओर से भी आर्थिक दंड की संभावना रहेगी।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रक्त से संबंधित रोग या चोट आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यवसाय में भी हानि हो सकती है। दामपत्य जीवन में भी कटुता आ सकती है।

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए दशमेश सूर्य की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में अधिक यात्रा करनी पड़ सकती है। पेट या गुदा के रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। समाज में मान-सम्मान की हानि हो सकती है। भाई बंधुओं के बीच आदर में कमी के कारण मन में कष्ट एवं अशांति रहेगी। भाइयों तथा मित्रों से विवाद या मनमुटाव हो सकता है। रोजगार एवं कार्यक्षेत्र में भी बाधाएं उत्पन्न होंगी।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। कार्य की प्रगति के लिए समय अनुकूल है परंतु दांपत्य जीवन में ससुराल पक्ष के हस्तक्षेप के कारण कटुता आ सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा। क्रोध पर नियंत्रण रखें। क्रोध के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मनोबल के प्रभाव से सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु व्यवसाय में हानि हो सकती है। यात्रा में व्यय होगा।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा। सगे संबंधियों से विवाद हो सकता है। जीवनसाथी को रक्त से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु-धनु लग्न एवं राशि वालों के लिए नवमेश सूर्य की गोचर से छठे भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। शत्रु पर विजय प्राप्त होगी। शोक मोह आदि विकलता उत्पन्न करने वाले भावों का नाश होगा। अर्थात चित स्वस्थ रहेगा एवं मन प्रसन्न रहेगा। कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में रोगों का नाश होगा अर्थात रोग से मुक्ति मिलेगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिस कार्य को आरंभ करेंगे उसमें सफलता की प्राप्ति होगी।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मन प्रसन्न रहेगा। मनोबल के प्रभाव से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। अन्न एवं धन दोनों में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इसके प्रभाव से बाहरी स्थान से मान-सम्मान प्राप्त होगा। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। यात्रा हो सकती है। बाहरी स्थान के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। शत्रु भी आय की वृद्धि में सहायक सिद्ध होंगे।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर-मकर राशि एवं लग्न वालों के लिए अष्टमेश सूर्य की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में मन में शोभ रहेगा। रोग मोह आदि के कारण मानसिक विकलता रहेगी। संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में भी मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण कार्य में हानि हो सकती है। आय में कमी के कारण संचित धन की हानि होगी।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में व्यवसाय में बाधा उत्पन्न होगी। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अशांति रहेगी

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में सुख में कमी का आभास होगा। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। आय के क्षेत्र में भी कमी आ सकती है। शरीर के निचले भाग में चोट आदि से कष्ट हो सकता है।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-कुंभ राशि एवं लग्न वालों के लिए सप्तमेश सूर्य के गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में रोग में वृद्धि होगी। सुख के कार्यों में बाधाएं उत्पन्न होंगी। भूमि मकान आदि से संबंधित विवाद के कारण मन अशांत रहेगा। माता पिता का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। सरकारी कार्य में भी हानि होगी। मान-सम्मान में कमी आएगी। जनसाधारण से भी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्त्री वर्ग के सहयोग से या किसी स्त्री उच्च पदाधिकारी के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा । ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में प्रतिस्पर्धा के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है। मनोबल की कमी रहेगी। रोग में वृद्धि होगी।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। साझेदारी के व्यवसाय में हानि हो सकती है। पराक्रम में हानि होगी। मित्रों के साथ वैचारिक मतभेद हो सकता है।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन-मीन राशि एवं लग्न वालों के लिए षष्ठेश सूर्य की गोचर से तीसरे भाव में उपस्थिती के परिणाम स्वरूप इस अवधि में नए स्थान की प्राप्ति होगी। संचित धन में वृद्धि होगी। शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। जिससे मन प्रसन्न रहेगा। हर्ष उत्पन्न करने वाले कार्य भी होंगे। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

15 मई से 25 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में उच्च पदाधिकारियों एवं सज्जन लोगों से संबंध बनेंगे। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिसके प्रभाव से कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

25 मई से 8 जून तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।विधा एवं संतान के द्वारा आय में वृद्धि होगी। सभी के साथ संबंध रहेंगे।

8 जून से 15 जून तक सूर्य मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में घर में मांगलिक कार्य होंगे। कार्य में सफलता प्राप्त होगी। इस अवधि में जिस कार्य को आरंभ करेंगे उस कार्य में सिद्धि प्राप्त होगी।