सूर्य का मीन राशि में संचार - 14 मार्च 2021 - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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सूर्य का मीन राशि में संचार – 14 मार्च 2021

सूर्य सिद्धान्त के अधिष्ठाता भगवान सूर्य अपनी गत्यात्मक अवस्था में मीन राशि में प्रवेश कर रहे है

14  मार्च  2021 को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगे  और  14 अप्रैल 2021 तक मीन राशि में रहेगे :-

भुवन भास्कर भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं उपनिषदों में भगवान सूर्य के तीन रूपों का विवेचन हुआ- 1-निर्गुण-निराकार 2-सगुण-निराकार 3-सगुण-साकार छांदोपनिषद में सूर्य को ब्रह्म कि संज्ञा दी गयी,”आदित्यम ब्रहमेति”। भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया कि-

“ॐ चित्रन देवानामुदगादनीकम चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्ने:। आप्रा द्यावापृथिवी अंतरिक्षम सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च॥” अर्थात जो तेजोमय किरणों के पुंज हैं,मित्र,वरुण तथा अग्नि आदि देवताओं एवं समस्त विश्व के प्राणियों के नेत्र हैं और स्थावर-जंगमात्मक समस्त जीवनिकाय के अन्तर्यामी आत्मा हैं,वे भगवान सूर्य आकाश,पृथ्वी और अन्तरिक्ष लोक को अपने प्रकाश से पूर्ण करते हुए आश्चर्य रूप से उदित हो रहे हैं। वशिष्ठ जी ने भी प्रार्थना करते हुए कहा कि,”जो ज्ञानियों के अंतरात्मा,जगत को प्रकाशित करने वाले,संसार के हितैषी,स्वयम्भू तथा सहस्त्र उद्दीप्त नेत्रों से सुशोभित हैं,उन अमित तेजस्वी सुर श्रेष्ठ भगवान सूर्य को नमस्कार है । आज संसार को प्रकाशित करने वाले तेजोमय,हितैषी, ग्रहों के राजा सूर्य कन्या राशि में गमन कर रहे हैं,आइये जाने सूर्य का मीन राशि में पारगमन  किस प्रकार के फल को प्रदान करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-  मेष राशि  वाले जातकों के लिए पंचमेश सूर्य की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। संतान के लिए समय अनुकूल नहीं रहेगा। विद्या के क्षेत्र में भी रुकावट आ सकती है। लंबी यात्रा हो सकती है। राजकीय कार्य में भी हानि हो सकती है। ज्वर एवं नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है। अपयश की प्राप्ति हो सकती है। अपमान का भय बना रहेगा। मित्र भी शत्रुवत् व्यवहार करेंगे।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में निर्माणकारी कार्य या धार्मिक कार्य में व्यय होगा। सरकारी कार्य हेतु यात्रा हो सकती है। यात्रा लाभप्रद रहेगी। बाहरी स्थान से सफलता प्राप्त होगी।

17  मार्च से 31 मार्च  तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। धन हानि हो सकती है। सरकारी कार्य या कार्यक्षेत्र में रुकावट आ सकती है। अपव्यय हो सकता है।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में पेट के रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। शत्रुओं में वृद्धि होगी। कुटुंब में वैमनस्यता बढ़ेगी। धन की हानि हो सकती है। मित्रों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। पराक्रम की हानि हो सकती है।

 

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष-  वृष राशि वाले जातकों के लिए चतुर्थेश सूर्य की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में स्थान की प्राप्ति होगी। समाज में मान सम्मान में वृद्धि होगी। भूमि वाहन आदि की प्राप्ति होगी। राज्य या सरकार की ओर से कृपा प्राप्त होगी। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। रोग से मुक्ति मिलेगी। आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। मन शांत रहेगा। सात्विकता में वृद्धि होगी।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आकस्मिक धन लाभ मिलेगा। धार्मिक कार्य से भी धन की प्राप्ति हो सकती है। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में हर प्रकार का लाभ होगा। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। नए पद की प्राप्ति हो सकती है। उच्च पदाधिकारियों तथा बड़ों का सहयोग प्राप्त होगा।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में विद्या एवं संतान का सुख प्राप्त होगा। संचित धन में वृद्धि होगी।वाणी के प्रभाव से मान सम्मान की प्राप्ति होगी। कुटुंब में सुख एवं समृद्धि की वृद्धि होगी।

 

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- मिथुन राशि  वाले जातकों के लिए तृतीयेश सूर्य की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में जिस कार्य की सिद्धि के लिए कार्य करेंगे उसमें सफलता की प्राप्ति होगी। कोई भी बड़ा कार्य उठाया गया हो तो वह पूरा होगा। पराक्रम में वृद्धि होगी। मित्र एवं छोटे भाई बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। मान-सम्मान तथा पुरुषार्थ में वृद्धि होगी। समाज में प्रतिष्ठित लोगों से संबंध बनेंगे। उच्च पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। माता को ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र एवं व्यवसाय में वृद्धि होगी तथा व्यवसाय से लाभ मिलेगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। गुरुजनों एवं बड़े लोगों से आशीर्वाद की प्राप्ति होगी।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। पिता के द्वारा या पिता के व्यवसाय से आय में वृद्धि होगी। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। नए वाहन एवं पद की प्राप्ति हो सकती है। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। बुद्धि के द्वारा राजकीय कार्य में यश की प्राप्ति होगी।  

 

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- कर्क राशि  वालों के लिए द्वितीयेश सूर्य की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में वाणी में कठोरता एवं स्वभाव में क्रोध की अधिकता के कारण धन हानि हो सकती है। इस अवधि में वाणी एवं क्रोध पर नियंत्रण रखने में ही भलाई है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। मन अशांत रहेगा। अपने प्रिय लोगों से विरह हो सकता है। कुटुंब में वैमनस्यता बढ़ेगी। प्रत्येक कार्य में असफलता मिलने के कारण मन खिन्न रहेगा।

14  मार्च से 17  मार्च  तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में पुण्य की हानि होगी। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। उच्च पदाधिकारियों से विवाद हो सकता है। विवाद से बचें। विवाद के कारण कार्य क्षेत्र में हानि हो सकती है। उच्च पदाधिकारी तथा बड़े लोगों का सम्मान करने से लाभ मिलेगा।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में व्यवसाय में हानि हो सकती है। दांपत्य जीवन में कलह उत्पन्न हो सकता है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। हड्डी एवं नस से संबंधित रोग में वृद्धि हो सकती है।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में बाहरी स्थान से आय में वृद्धि हो सकती है। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। वाणी दोष के कारण मित्रों से विवाद हो सकता है।

 

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- सिंह राशि  वाले जातकों के लिए लग्नेश सूर्य की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। जातक को अपने अच्छे एवं बुरे कर्मों के फल की प्राप्ति होगी। आकस्मिक धन की हानि हो सकती है। कुटुंब में विरोध का सामना करना पड़ेगा। ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। राजकीय कर्मचारी या अधिकारी से भय रहेगा। राजभय व जुर्माना गिरफ्तारी हो सकती है। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने के कारण मन में चिंता बनी रहेगी।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में विद्या एवं संतान का सहयोग प्राप्त होगा। आकस्मिक धन हानि हो सकती है।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में शत्रुओं के कारण धन हानि हो सकती है। शत्रुओं में वृद्धि हो सकती है। दांपत्य सुख में कमी रहेगी।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में वाणी दोष के कारण कुटुंब में कलह उत्पन्न होगा तथा धन की हानि हो सकती है। आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहेगी। कार्यक्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।  

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- कन्या राशि  वाले जातकों के लिए व्ययेश सूर्य की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में लंबी यात्रा हो सकती है। यात्रा में कष्ट एवं धन हानि हो सकती है। पेट या गुदा रोग बवासीर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यवसाय में हानि हो सकती है। दांपत्य जीवन में वैमनस्यता उत्पन्न हो सकती है। स्त्री/ पति को शारीरिक कष्ट हो सकता है। सम्मान हानि आदर की कमी के कारण मन में कलेश का अनुभव हो सकता है।

14  मार्च से 17  मार्च  तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र में असफलता एवं व्यवसाय में हानि हो सकती है। इस अवधि में सुख में हानि होगी। भूमि वाहन एवं मकान आदि का उतम सुख प्राप्त नहीं होगा। सिर दर्द ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में शत्रुओ में वृद्धि होगी। प्रतिस्पर्धा के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है। संतान एवं स्त्री को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अशांति रहेगी।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में पारिवारिक जीवन में ससुराल पक्ष के हस्तक्षेप के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। राजकीय कार्य में भी मनोनुकूल सफलता नहीं मिलेगी। सूर्य की उपासना करने से लाभ मिलेगा|

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- तुला राशि  वाले जातकों के लिए आयेश सूर्य की गोचर से आठवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में रोगों का नाश होगा। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। शोक मोह आदि विकलता उत्पन्न करने वाले भावों का नाश होगा। अर्थात चित्त स्वस्थ रहेगा। पिता के द्वारा या पिता के व्यवसाय से आय में वृद्धि होगी। राजकीय कोष से भी धन की प्राप्ति हो सकती है। नौकरी या कार्यक्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी।

14  मार्च से 17  मार्च  तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में ननिहाल पक्ष का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। चाचा बुआ आदि से संबंध मधुर रहेंगे। शत्रु पराजित होंगे।पराक्रम में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। कार्य में सफलता प्राप्त होगी।धार्मिक क्षेत्र में रुचि बढ़ेगी। धार्मिक यात्रा भी हो सकती है। आमोद प्रमोद में व्यय हो सकता है।

 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए दशमेश सूर्य की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में मन मे क्षोभ उत्पन्न हो सकता है। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने से मन में क्षोभ उत्पन्न होगा|  रोग मोह आदि के कारण मानसिक विकलता रहेगी। शारीरिक एवं मानसिक शक्ति में कमी आ सकती है। माता पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। उच्च पदाधिकारी एवं सहयोगी से वाद विवाद के कारण कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है। संतान को कष्ट हो सकता है।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में वाणी के प्रभाव से आय में वृद्धि हो सकती है। विद्या के क्षेत्र में हानि एवं संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। पुरुषार्थ की कमी के कारण कार्यक्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। सुख में कमी का आभास होगा। मित्रों से विरोध का सामना करना पड़ेगा।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। अविवेकपूर्ण निर्णय या क्रोध में लिए गए निर्णय के कारण कार्य एवं आय में हानि हो सकती है। ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।  

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- धनु  राशि वालों के लिए भाग्येश सूर्य की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में रोग में वृद्धि होगी। मानसिक एवं शारीरिक कष्ट हो सकता है। आपसी विवाद के कारण सुख में कमी उत्पन्न होगी। भूमि से संबंधित समस्या के कारण मन अशांत रहेगा। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। धार्मिक यात्रा हो सकती है। यात्रा में शारीरिक कष्ट एवं धन का अपव्यय हो सकता है। जनसंपर्क में मानहानि हो सकती है। दांपत्य सुख में भी कमी आ सकती है।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। परंतु असंतोष के कारण सुख का आभास नहीं होगा। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। शरीर स्वस्थ रहेगा।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में भूमि से संबंधित विवाद के कारण कुटुंब में विवाद हो सकता है। पेट दर्द या ज्वर आदि के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्रों से वैचारिक मतभेद हो सकता है।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में दांपत्य सुख में कमी आ सकती है। कार्यक्षेत्र या नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी परंतु सहकर्मी एवं उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण हानि भी हो सकती है। इस अवधि में विवाद से बचे।

 

 

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- मकर राशि  वालों के लिए अष्टमेश सूर्य की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में आयु में वृद्धि होगी अर्थात रोग से मुक्ति एवं शरीर स्वस्थ रहेगा। पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी परंतु छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। संचित धन में वृद्धि होगी तथा शुभ संदेश की प्राप्ति हो सकती है। शत्रुओं का नाश होगा तथा उनपर विजय प्राप्त होगी। कार्य में पूर्ण सफलता की प्राप्ति से मन प्रसन्न रहेगा। उच्च पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में बाहरी स्थान का सहयोग प्राप्त होगा। पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी तथा मान सम्मान की प्राप्ति होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र स्वामी शनि है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा तथा संचित धन में आकस्मिक वृद्धि हो सकती है।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा अर्थात कम परिश्रम से ही कार्य में सफलता प्राप्त हो सकती है। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे। धार्मिक यात्रा में व्यय हो सकता है।    

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ- कुंभ राशि वालों के लिए सप्तमेश सूर्य की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में नेत्र विकार एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। लोगों से सावधान रहें लोग अपना कार्य सिद्ध करने के लिए धोखा दे सकते हैं। मित्रों एवं भाई बंधुओं से भी विवाद हो सकता है। लोगों से धोखा खाने के कारण मनुष्य जिद्दी हो जाता है तथा स्वभाव में धूर्तता आ जाती है। व्यवसाय से संचित धन में वृद्धि हो सकती है परंतु दांपत्य सुख में कमी रहेगी। जीवनसाथी को भी ज्वर एवं सिर दर्द आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में स्व-निर्णय से लाभ होगा परंतु दूसरों के बहकावे में कार्य करने से आय में कमी होगी तथा धन में हानि हो सकती है। क्रोध पर नियंत्रण रखें। क्रोध के कारण कुटुंब में कलह उत्पन्न हो सकता है।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में लंबी यात्रा हो सकती है परंतु यात्रा सुखदायी नहीं रहेगी या यात्रा में हानि हो सकती है। स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में दांपत्य सुख में कमी आ सकती है। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। संतान से भी वैचारिक मतभेद रहेगा। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा।

 

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन- मीन राशि  वालों के लिए षष्ठेश सूर्य की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में जातक क्रोध में रहेगा। मन के प्रतिकूल परिस्थिति होने के कारण क्रोध आता है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। कठिन परिश्रम के होते हुए भी कार्य में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। बिना किसी उद्देश्य के यात्रा होगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। उदर विकार रक्त से संबंधित रोग हृदय रोग आदि के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। सरकारी कार्य या कार्यक्षेत्र में भी बाधा उत्पन्न होगी। दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा।

14  मार्च से 17  मार्च तक सूर्य पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। परिवार में कलह उत्पन्न होगा जिसके कारण मन अशांत रहेगा। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।

17  मार्च से 31 मार्च तक सूर्य उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में नौकर वर्ग के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है। यात्रा का निषेध करें। यात्रा में शारीरिक कष्ट एवं धन हानि हो सकती है।

31 मार्च से 14 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में उदर विकार आंत से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। सुख में हानि होगी। भूमि वाहन आदि से संबंधित विवाद हो सकता है।

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