सूर्य का सिंह राशि में संचार - 16 अगस्त 2020 - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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सूर्य का सिंह राशि में संचार – 16 अगस्त 2020

सूर्य सिद्धान्त के अधिष्ठाता भगवान सूर्य अपनी गत्यात्मक अवस्था में मकर राशि में प्रवेश कर रहे है

16 अगस्त 2020 को सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करेगा और 16 सितम्बर 2020 तक सिंह राशि में रहेगा:-

भुवन भास्कर भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं उपनिषदों में भगवान सूर्य के तीन रूपों का विवेचन हुआ- 1-निर्गुण-निराकार 2-सगुण-निराकार 3-सगुण-साकार छांदोपनिषद में सूर्य को ब्रह्म कि संज्ञा दी गयी,”आदित्यम ब्रहमेति”। भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया कि-

“ॐ चित्रन देवानामुदगादनीकम चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्ने:। आप्रा द्यावापृथिवी अंतरिक्षम सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च॥” अर्थात जो तेजोमय किरणों के पुंज हैं,मित्र,वरुण तथा अग्नि आदि देवताओं एवं समस्त विश्व के प्राणियों के नेत्र हैं और स्थावर-जंगमात्मक समस्त जीवनिकाय के अन्तर्यामी आत्मा हैं,वे भगवान सूर्य आकाश,पृथिवी और अन्तरिक्ष लोक को अपने प्रकाश से पूर्ण करते हुए आश्चर्य रूप से उदित हो रहे हैं। वशिष्ठ जी ने भी प्रार्थना करते हुए कहा कि,”जो ज्ञानियों के अंतरात्मा,जगत को प्रकाशित करने वाले,संसार के हितैषी,स्वयम्भू तथा सहस्त्र उद्दीप्त नेत्रों से सुशोभित हैं,उन अमित तेजस्वी सुर श्रेष्ठ भगवान सूर्य को नमस्कार है । आज संसार को प्रकाशित करने वाले तेजोमय,हितैषी, ग्रहों के राजा सूर्य सिंह राशि में गमन कर रहे हैं,आइये जाने सूर्य का सिंह राशि में पारगमन  किस प्रकार के फल को प्रदान करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए पंचमेश सूर्य के गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। संतान सुख की प्राप्ति होगी तथा संतान से मधुर संबंध रहेंगे। राजकीय कार्य में भी सफलता की प्राप्ति होगी। गोचर से पंचम भाव में सूर्य शुभ फल प्रदान नहीं करता। इसके कारण मन में क्षोभ रहेगा।रोग एवं मोह के कारण मानसिक विकलता हो सकती है। यात्रा में कष्ट हो सकता है।राज्याधिकारियों से विवाद हो सकता है। आय स्थान पर पूर्ण दृष्टि के कारण आय में कमी आ सकती है। बड़े भाई को ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। शरीर के निचले भाग में हड्डी से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में संतान के प्रति मोह के कारण मानसिक कष्ट हो सकता है। अध्यात्म के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। आय में रूकावट या कमी रहेगी।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। वाणी में कठोरता के कारण कुटुंब में कलह रहेगा। संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। राजकीय कार्य में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- वृष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए चतुर्थेश सूर्य की चतुर्थ भाव में गोचर से उपस्थिति के परिणाम स्वरूप भूमि वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा। माता का स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। परंतु मन में असंतोष के कारण पूर्ण सुख की अनुभूति नहीं होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। राजकीय क्षेत्र तथा नौकरी के क्षेत्र में हानि हो सकती है। यात्रा में असुविधा के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य सुख में कमी रहेगी। स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। जिसके कारण भूमि आदि से संबंधित विवाद हो सकता है। सुख के कार्यों में क्रोध के कारण बाधा हो सकती है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वायु जनित रोग से उदर विकार हो सकता है। सरकारी कार्य में हानि हो सकती है तथा मान सम्मान में कमी आ सकती है। बुद्धि में भ्रम की स्थिति रहेगी जिसके कारण निर्णायक क्षमता में कमी रहेगी।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। ऐश्वर्य में वृद्धि होगी। स्त्री वर्ग का सहयोग प्राप्त होगा।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में माता का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। राजकीय क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त होगा। क्रोध की अधिकता रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखने में ही भलाई है नहीं तो क्रोध के कारण बनते हुए कार्य भी बिगड़ सकते हैं।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- मिथुन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए तृतीयेश सूर्य की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। भाई बहन का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। स्थान की प्राप्ति होगी। संचित धन में वृद्धि होगी शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। शत्रुओं का नाश एवं उन पर विजय प्राप्त होगी। धार्मिक कार्य में विशेष श्रद्धा नहीं रहेगी। नौकरी के क्षेत्र में इस अवधि में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा तथा उच्च पदाधिकारियों से संबंध बनेंगे।शुभ कार्य करने से मन में हर्ष उत्पन्न होगा। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा तथा धन लाभ भी हो सकता है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में धार्मिक कार्य में विशेष रूचि रहेगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा तथा कम परिश्रम से ही कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में वृद्धि होगी। निर्माणकारी कार्य या वाहन आदि में व्यय होगा। संतान का सुख प्राप्त होगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पुरुषार्थ में वृद्धि होगी तथा प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। समाज में प्रतिष्ठित व्यक्तियों तथा राज्य अघिकारियों से संबंध बनेंगे।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क-कर्क राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए द्वितीयेश सूर्य की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी। कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा। परंतु स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह समय अनुकूल नहीं है। नेत्र विकार एवं सर दर्द से शारीरिक कष्ट हो सकता है। स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। लोग धोखा देकर अपना कार्य सिद्ध करने में सफल हो सकते हैं। वाणी में कठोरता के कारण व्यापार में हानि हो सकती है। अष्टम स्थान पर पूर्ण दृष्टि के कारण आयु में हानि अर्थात शरीर अस्वस्थ रहेगा। रोगों में वृद्धि होगी। ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में संचित धन की हानि एवं परिवार में कलह उत्पन्न हो सकता है। वात एवं वायुजनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा तथा वाहन आदि में भी व्यय हो सकता है। कुटुंब के सहयोग से आय में वृद्धि होगी। ठंडक से तथा कफ से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी तथा धन के प्रभाव से समाज में सम्मान प्राप्त होगा परंतु स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।
 

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह-सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश सूर्य की गोचर से लग्न अर्थात प्रथम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। आत्मबल में वृद्धि होगी। कार्य में सफलता की प्राप्ति के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। मनोनुकूल परिस्थिति ना होने के कारण क्रोध की अधिकता रहेगी। यात्रा अधिक होगी। सप्तम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। परिवार से अलग रहना पड़ सकता है। व्यापार में हानि हो सकती है। 

 
16 अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में शारीरिक कष्ट हो सकता है। बिना किसी उद्देश्य के यात्रा हो सकती है। 
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में मित्रों से विवाद हो सकता है। जिसके कारण मन में अशांति रहेगी। कार्यक्षेत्र या सरकारी कार्य एवं नौकरी में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। जिसके कारण स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। 
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। परिश्रम के अनुसार कार्य में सफलता प्राप्त होगी। दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। ज्वर आदि से या ताप से संबंधित रोग से जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। 
 

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या-कन्या राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए व्ययेश सूर्य की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। परंतु बाहरी स्थान से सहयोग प्राप्त होगा। शत्रुओ में वृद्धि होगी। मित्र भी शत्रुवत् व्यवहार करेंगे। व्यय की अधिकता के कारण संचित धन में हानि होगी। ज्वर आदि रोग से शारीरिक कष्ट भी हो सकता है। शरीर में पीड़ा रहेगी। लंबी यात्रा हो सकती है। यात्रा में व्यय एवं शारीरिक कष्ट हो सकता है। छठे भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण उदर विकार से कष्ट हो सकता है। राज्याधिकारियों से भी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वायु जनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यय की अधिकता रहेगी। धन हानि हो सकती है।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में संचित धन में हानि होगी। धार्मिक या सरकारी कार्य हेतु लंबी यात्रा हो सकती है। बाहरी स्थान से धन प्राप्ति का भी योग बन रहा है।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उतराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे।शत्रुओ के कारण धन हानि हो सकती है।
 

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला-तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिएआयेश सूर्य की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में विभिन्न स्रोत से आय की प्राप्ति होगी। समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। नवीन पद भी प्राप्त हो सकता है। सरकारी कार्य नौकरी के क्षेत्र में शरीर स्वस्थ रहेगा। रोग व्याधि से छुटकारा मिलेगा। आध्यात्मिक एवं मांगलिक कार्य में व्यय होगा। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। पिता के द्वारा एवं राजकीय कोष से भी आय में वृद्धि हो सकती है। पराक्रम में वृद्धि होगी। पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण विद्या के क्षेत्र में हानि हो सकती है।संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता हो सकता है। संतान से वैचारिक मतभेद भी हो सकता है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में आय में वृद्धि होगी। बड़े भाई का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। वाणी में तेज या तीव्रता रहेगी।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से समय अति उत्तम है। आध्यात्मिक क्षेत्र में प्राप्ति होगी। विद्या के द्वारा आय में वृद्धि होगी। मान सम्मान में वृद्धि होगी।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। सरकारी क्षेत्र में मान सम्मान में वृद्धि होगी तथा पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा।
 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए दशमेश सूर्य की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में जिस भी कार्य की सिद्धि के लिए काम करेंगे उसमें सफलता की प्राप्ति होगी। पिता का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। प्रशासनिक एवं सरकारी कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। समाज में प्रतिष्ठित लोग तथा उच्च पदाधिकारियों से मित्रता होगी। मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा के लिए कभी उग्र कर्म भी करना पड़ेगा। शरीर स्वस्थ रहेगा तथा मित्रों के साथ भी संबंध मधुर रहेंगे। पराक्रम में वृद्धि होगी तथा यश की प्राप्ति होगी।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि वाहन तथा मकान आदि के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। राजनीति के क्षेत्र से लाभ मिलेगा।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में स्त्री वर्ग का सहयोग प्राप्त होगा। समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा। सरकारी कार्य से संबंधित लंबी यात्रा हो सकती है। यात्रा सुखदाई रहेगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। कठिन से कठिन कार्य को प्रारंभ करने से कार्य में सिद्धि मिलेगी। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु-धनु लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए भाग्येश सूर्य की गोचर से भाग्य भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। धार्मिक कार्य में विशेष रुचि उत्पन्न होगी। तृतीय भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण पराक्रम में हानि हो सकती है। मित्रों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। इस अवधि में पुरुषार्थ से अधिक भरोसा भाग्य का रहेगा। नवम भाव में गोचर से सूर्य की उपस्थिति शुभ फल प्रदान नहीं करती इसके कारण कार्य में असफलता की प्राप्ति हो सकती है। सरकारी क्षेत्र में या सामाजिक क्षेत्र में झूठा आरोप भी लग सकता है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में धन एवं पुण्य की हानि हो सकती है। मित्रों से मतभेद हो सकता है।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में शत्रुओं के कारण कार्य में रूकावट आ सकती है। आय के दृष्टिकोण से समय अनुकूल है। परंतु बड़े भाई एवं बड़ों से विवाद हो सकता है। बड़ों से विरोध एवं विवाद के कारण अपमान का भय रहेगा।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इसमें प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। भाग्य का सुख प्राप्त होगा। धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। शत्रु पराजित होंगे।
 

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर-मकर राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए  अष्टमेश सूर्य की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में संचित कर्म के फल की प्राप्ति होगी अर्थात शुभ एवं अशुभ कर्म के फल की प्राप्ति होगी। द्वितीय भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण कुटुंब में लड़ाई झगड़ा विवाद रहेगा, जिसके कारण संचित धन में हानि हो सकती है। नेत्र विकार से शारीरिक कष्ट हो सकता है। सिरदर्द, शरीर में पीड़ा एवं ज्वर आदि से कष्ट हो सकता है। जीवन साथी को भी शारीरिक कष्ट का भय रहेगा। उच्च पदाधिकारी या अधिकारियों से भी मतभेद हो सकता है। जिसके कारण उनकी नाराजगी का सामना करना पड़ेगा।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में गुदा रोग, बवासीर आदि तथा अपच के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। संचित धन में हानि हो सकती है।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में सरकारी क्षेत्र में पदाधिकारियों से वैचारिक मतभेद के कारण कार्यक्षेत्र एवं नौकरी में हानि हो सकती है वात एवं पित्त से जनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता हैं।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है  इस अवधि में ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। राजभय अर्थात मुकदमा आदि के कारण संचित धन मे हानि हो सकती है।

 

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-कुंभ राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए  सप्तमेश सूर्य की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी। लग्न पर पूर्ण दृष्टि के परिणामस्वरुप इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। पेट एवं गुदा रोग, बवासीर आदि से कष्ट होगा। लंबी यात्रा हो सकती है परंतु यात्रा सुखदाई नहीं रहेगी। मान सम्मान में हानि के कारण मन में अशांति रहेगी। संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। सरकारी कार्य में बाधाएं आ सकती हैं। सिरदर्द एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में फोड़ा आदि से तथा त्वचा रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी को भी उदर विकार से कष्ट हो सकता है। व्यवसाय में हानि हो सकती है।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा। स्त्री वर्ग एवं ससुराल से सहयोग प्राप्त होगा तथा व्यवसाय में वृद्धि होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में सिरदर्द एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यवसाय से लाभ की प्राप्ति होगी। जीवनसाथी का सहयोग एवं सुख प्राप्त होगा।
 

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन- मीन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए षष्ठेश सूर्य की गोचर से छठवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। रोग व्याधि से छुटकारा प्राप्त होगा अर्थात रोगों का नाश होगा। प्रत्येक कार्य में सिद्धि प्राप्त होगी।निज प्रताप में वृद्धि होगी। शोक, मोह आदि विकलता उत्पन्न करने वाले भावों का नाश होगा। मन प्रसन्न एवं चित्त स्वस्थ रहेगा। ननिहाल पक्ष का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। चाचा, बुआ, मामा, मौसी आदि से मधुर संबंध रहेंगे। व्यय भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण बाहरी स्थान से संबंध बनेंगे तथा बाहरी स्थान से आय में वृद्धि होगी।

16  अगस्त से 30 अगस्त तक सूर्य मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में शत्रु प्रभावहीन रहेंगे। सभी प्रकार के अरिष्टो का नाश होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा।
 
30 अगस्त से 13 सितंबर तक सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। मित्र एवं छोटे भाई बहन का सहयोग प्राप्त होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा।
 
13 सितंबर से 16 सितंबर तक सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी तथा पहले से रुके हुए कार्य को भी सिद्धि प्राप्त होगी। विवादित समस्याओं का समाधान होगा।

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