सूर्य का कर्क राशि में गोचर- 16-जुलाई-2021 - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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April 6, 2021
सूर्य का कन्या राशि में संचार – 17 सितम्बर 2020
September 16, 2021

सूर्य का कर्क राशि में गोचर- 16-जुलाई-2021

सूर्य सिद्धान्त के अधिष्ठाता भगवान सूर्य अपनी गत्यात्मक अवस्था में मकर राशि में प्रवेश कर रहे है।

16 जुलाई 2021  को सूर्य कर्क  राशि में प्रवेश करेगा और 17 अगस्त 2021 तक कर्क राशि में रहेगा:-

भुवन भास्कर भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं उपनिषदों में भगवान सूर्य के तीन रूपों का विवेचन हुआ-
1-निर्गुण-निराकार 2-सगुण-निराकार 3-सगुण-साकार
छांदोपनिषद में सूर्य को ब्रह्म कि संज्ञा दी गयी,”आदित्यम ब्रहमेति”।
भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया कि-

“ॐ चित्रन देवानामुदगादनीकम चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्ने:।
आप्रा द्यावापृथिवी अंतरिक्षम सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च॥”
अर्थात जो तेजोमय किरणों के पुंज हैं,मित्र,वरुण तथा अग्नि आदि देवताओं एवं समस्त विश्व के प्राणियों के नेत्र हैं और स्थावर-जंगमात्मक समस्त जीवनिकाय के अन्तर्यामी आत्मा हैं,वे भगवान सूर्य आकाश,पृथिवी और अन्तरिक्ष लोक को अपने प्रकाश से पूर्ण करते हुए आश्चर्य रूप से उदित हो रहे हैं।
वशिष्ठ जी ने भी प्रार्थना करते हुए कहा कि,”जो ज्ञानियों के अंतरात्मा,जगत को प्रकाशित करने वाले,संसार के हितैषी,स्वयम्भू तथा सहस्त्र उद्दीप्त नेत्रों से सुशोभित हैं,उन अमित तेजस्वी सुर श्रेष्ठ भगवान सूर्य को नमस्कार है ।
आज संसार को प्रकाशित करने वाले तेजोमय,हितैषी, ग्रहों के राजा सूर्य कर्क राशि में गमन कर रहे हैं,आइये जाने सूर्य का कर्क राशि में पारगमन  किस प्रकार के फल को प्रदान करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष- मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए पंचमेश सूर्य की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के कारण विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। परंतु माता के सुख में कमी आ सकती है। माता को इस अवधि में शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि एवं मकान से संबंधित विवाद भी हो सकता है। दशम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण पिता से वैमनष्यता हो सकती है। सरकारी कार्य में हानि तथा मान सम्मान में कमी आ सकती है। नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त हो सकती है। पंचमेश की चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप विपरीत परिस्थिति के होते हुए भी अंततोगत्वा मान-सम्मान बना रहेगा।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में यात्रा हो सकती है तथा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। मान सम्मान प्राप्त होगा।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है। नौकरी के क्षेत्र में उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण हानि हो सकती है। माता पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अशांति रहेगी।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में शत्रुओं से परेशानी आ सकती है। यात्रा आदि में व्यय होगा। पराक्रम में वृद्धि होगी।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- वृष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए चतुर्थेश सूर्य की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी तथा यश की प्राप्ति होगी। माता पिता का सुख प्राप्त होगा। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। नवम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण धर्म के कार्य में मन नहीं लगेगा। भाग्य की अपेक्षा पुरुषार्थ पर विश्वास में ही भलाई है। परिश्रम के अनुसार या परिश्रम से ही कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आय में वृद्धि होगी। शरीर स्वस्थ रहेगा तथा समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। परिणामस्वरुप  भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। कार्य में रुकावट आ सकती है। परंतु पुरुषार्थ के द्वारा सफलता प्राप्त होगी। धार्मिक कार्य में अरुचि उत्पन्न होगी।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी। वाणी एवं विद्या के द्वारा आय की प्राप्ति होगी तथा समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। संतान सुख प्राप्त होगा। शत्रुओं का नाश होगा तथा शुभ समाचार की प्राप्ति होगी।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- मिथुन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए तृतीयेश सूर्य की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में पुरुषार्थ के द्वारा धन में वृद्धि प्राप्त होगी। परंतु कुटुंब का सुख प्राप्त नहीं होगा। परिवार में अशांति रहेगी। लोग उस को धोखा देकर अपने कार्य में सफलता प्राप्त करेंगे। दुष्ट एवं बुरे कर्मों में लिप्त लोगों से संबंध बन सकते हैं। सिर दर्द एवं नेत्र विकार से शारीरिक कष्ट होगा। मित्रों एवं भाई बंधुओं से वैमनस्यता हो सकती है। अष्टम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण दैनिक दिनचर्या में भी अशांति रहेगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। धार्मिक कार्य में श्रद्धा नहीं रहेगी। व्यापार में हानि हो सकती है।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धन में वृद्धि होगी तथा कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में धन हानि एवं कुटुंब में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। शरीर दर्द सिरदर्द नेत्र विकार एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। कार्य में अवरोध उत्पन्न होगा।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में व्यापार में हानि तथा कार्यक्षेत्र में असफलता प्राप्त हो सकती है। वाणी दोष के कारण मित्रों एवं संबंधियों से विवाद हो सकता है। सुख में कमी का आभास होगा।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क-कर्क राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए द्वितीयेश सूर्य की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में परिश्रम के द्वारा ही कार्य में सफलता प्राप्त होगी। आर्थिक दृष्टिकोण से समय अनुकूल है। परंतु व्यय की अधिकता रहेगी अर्थात धन खर्च होगा। लंबी यात्रा भी हो सकती है। यात्रा नहीं हुई तो जिस स्थान में मनुष्य रहता है वहीं बहुत चलना पड़ेगा। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। हड्डी से संबंधित रोग थकावट उदर विकार नेत्र के रोग तथा ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। सप्तम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण दांपत्य सुख में कमी रहेगी। परिवार से दूर रहना पड़ सकता है। व्यवसाय में हानि हो सकती है। मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति न होने से स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में शत्रुओं में वृद्धि होगी। धार्मिक कार्य में व्यय होगा तथा उदर एवं हृदय से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। व्यवसाय में हानि तथा रक्त एवं हड्डी से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। प्रत्येक कार्य विलंब से संपन्न होगा।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। मित्रों एवं संबंधियों से विवाद हो सकता है। उदर विकार आंत से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह-सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश सूर्य की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में यात्रा अधिक होगी। शरीर दुर्बल बना रहेगा। ज्वर आदि रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य जीवन में क्लेश एवं कलह रहेगा। भौतिक सुखों में हानि होगी। व्यय की अधिकता के कारण धन हानि होगी। नेत्र विकार से भी कष्ट हो सकता है । छठवें भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण शत्रुओं में वृद्धि होगी। मित्र भी शत्रुवत व्यवहार करेंगे। ननिहाल पक्ष से भी संबंध मधुर नहीं रहेंगे। चाचा बुआ मौसी आदि संबंधों में भी वैमनस्यता हो सकती है। उदर विकार से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में बाहरी स्थान से संबंध स्थापित हो सकते हैं। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। विद्या के क्षेत्र में हानि हो सकती है। संतान से वैचारिक मतभेद हो सकता है।
20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में अपव्यय हो सकता है। शत्रुओं में वृद्धि होगी। दांपत्य सुख में कमी रहेगी तथा जीवनसाथी से विवाद हो सकता है। यात्रा में व्यय होगा। लंबी यात्रा हो सकती है।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में बाहरी स्थान से आय की प्राप्ति हो सकती है या लंबी यात्रा में व्यय होगा। कुटुंब में विवाद एवं कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है।

 

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या-कन्या राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए व्ययेश सूर्य की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में लाभ में वृद्धि होगी परंतु साथ ही साथ व्यय की अधिकता रहेगी। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। पिता के द्वारा भी आय में वृद्धि हो सकती है। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा तथा रोग व्याधि से छुटकारा प्राप्त होगा। पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण विद्या के क्षेत्र में रुकावट आ सकती है परंतु बाहरी स्थान में विद्या के प्रभाव से सम्मान प्राप्त होगा। संतान से वैचारिक मतभेद हो सकता है।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। वाहन अधिकतम सुख प्राप्त होगा। व्यवसाय के द्वारा आय में वृद्धि हो सकती है।
20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि मे संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। चाचा बुआ आदि का सहयोग प्राप्त होगा। सात्विकता में वृद्धि होगी।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में विभिन्न स्रोत से आय में वृद्धि होगी। पदाधिकारियों के सहयोग से पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से संबंध बनेंगे।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला-तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए आयेश सूर्य की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में जिस कार्य को आरंभ करेंगे इसमें सफलता प्राप्त होगी। राज्य अधिकारियों एवं समाज में प्रतिष्ठित लोगों से मित्रता बढ़ेगी। सरकारी कार्य में सफलता एवं मान सम्मान की प्राप्ति होगी। व्यवसाय के द्वारा भी आय की प्राप्ति होगी। पिता के व्यवसाय या कार्य से भी धन की प्राप्ति का योग बन रहा है। नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। इस अवधि में कार्य की अधिकता रहेगी। चतुर्थ भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण भूमि वाहन आदि का सुख विलंब से प्राप्त होगा। माता का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। भूमि मकान आदि के कार्य में विलंब से सफलता प्राप्त होगी।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। मन प्रसन्न रहेगा। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे।
20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में बुद्धि एवं विद्या के प्रभाव से समाज एवं सरकारी क्षेत्र में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में कठिन से कठिन कार्य में भी सफलता प्राप्त होगी। बाहरी स्थान से मान सम्मान प्राप्त होगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी तथा यश की प्राप्ति होगी। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। आय के दृष्टिकोण से समय अति उत्तम है। विभिन्न स्रोतों से आय की प्राप्ति होगी।

 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए दशमेश सूर्य की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। धर्म के प्रति श्रद्धा उत्पन्न होगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें। क्रोध के कारण बने हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। राजकीय क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त होगा। परंतु अपने बड़ों तथा उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण यश की प्राप्ति तथा कार्य में हानि हो सकती है। तृतीय भाव पर पूर्ण दृष्टि के परिणाम स्वरुप भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्रों तथा संबंधियों से वैमनस्यता हो सकती है। कार्यक्षेत्र में मित्रों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। पराक्रम में हानि हो सकती है।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आय की प्राप्ति तथा धन में वृद्धि होगी। परंतु कुटुंब में विवाद हो सकता है। बड़े भाई को शारीरिक कष्ट हो सकता है। विवाद के कारण धन हानि भी हो सकती है।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में अपने प्रिय लोगों से विरह धर्म के प्रति अविश्वास तथा सुख में हानि हो सकती है। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। झूठा आरोप भी लग सकता है।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में आय में वृद्धि होगी तथा सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। शरीर में रोग उत्पन्न होगा तथा मन में अशांति रहेगी। मन में अकारण भय बना रहेगा।

 

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु-धनु राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए नवमेश सूर्य की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में शरीर स्वस्थ नहीं रहेगा। रोग आदि का भय बना रहेगा। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति न होने के कारण मन में चिंता रहेगी। नौकरी के क्षेत्र में भी सुखद समाचार की प्राप्ति नहीं होगी।अपने से उच्च पदाधिकारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। अधिकारी वर्ग की असंतुष्टि करण के कारण प्रगति में रुकावट आ सकती है। कुटुंब में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा। संचित धन में हानि हो सकती है। शत्रुओं से विवाद के कारण अपव्यय का योग बन रहा है।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। संचित बुरे कर्मों का फल प्राप्त होगा। सुख में हानि होगी। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में पराक्रम में हानि होगी। नेत्र विकार से शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य सुख में भी कमी आ सकती है। भाई बंधुओं तथा मित्रों से विवाद होगा। विवाद के कारण धन हानि तथा अपयश की प्राप्ति हो सकती है।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में राज्य आर्थिक दंड एवं गिरफ्तारी हो सकती है।आय में हानि होगी। पिता को ज्वर एवं उदर विकार से कष्ट हो सकता है। ज्वर आदि के कारण असाध्य शारीरिक कष्ट हो सकता है।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर-मकर राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश सूर्य की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है।मान-सम्मान की कमी के कारण मन में क्लेश का अनुभव रहेगा। व्यवसाय एवं कार्यक्षेत्र में हानि होगी तथा विभिन्न प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होगी। अधिक यात्रा करनी पड़ सकती है। उदर विकार गुदा रोग बवासीर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। लग्न पर पूर्ण दृष्टि के कारण स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। शरीर दर्द सिर दर्द एवं नेत्र विकार से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मित्रों से वैचारिक मतभेद हो सकता है। पुरुषार्थ की कमी रहेगी। व्यय की अधिकता के कारण मन अशांत रहेगा।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में असाध्य रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अशांति रहेगी। संचित धन में हानि होगी। कुटुंब में विवाद रहेगा।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यवसाय में हानि हो सकती है तथा आय में रुकावट उत्पन्न होगी। कठिन परिश्रम के होते हुए भी सफलता प्राप्त नहीं होगी। धार्मिक कार्य में अरुचि उत्पन्न होगी।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-कुंभ राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए सप्तमेश सूर्य की गोचर से छठे भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में चित्त स्वस्थ रहेगा। शोक मोह आदि विकलता उत्पन्न करने वाले भावों का नाश होगा। रोगों का नाश होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। सरकारी कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। उच्च पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। राजकीय कोष से भी धन की प्राप्ति हो सकती है। प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। बारहवें भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण व्यय की अधिकता रहेगी। बाहरी स्थान से संबंध स्थापित होंगे।

16 जुलाई से 20 जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में कुटुंब का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। आशा से अधिक आय एवं संचित धन में वृद्धि होगी। अन्न नए वस्त्र एवं आभूषण की प्राप्ति होगी। बड़े भाई का सुख प्राप्त होगा।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में व्यय अधिक होगा। मन एवं शरीर स्वस्थ रहेगा। विवादित समस्याओं का समाधान होगा। शत्रु पराजित होंगे।जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में जिस भी कार्य को आरंभ करेंगे उसमें सफलता की प्राप्ति होगी। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी तथा यश की प्राप्ति होगी। निज प्रताप में वृद्धि होगी।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन-मीन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए षष्ठेश सूर्य की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। परंतु संतान के पक्ष में कष्ट मिलेगा। मन में क्षोभ रहेगा। लोभ मोह आदि के कारण मानसिक विकलता रहेगी। रोग में वृद्धि होगी। जिसके कारण शरीर अस्वस्थ रहेगा। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। धन हानि भी हो सकती है। राज्य अधिकारियों से वाद विवाद से कार्य में असफलता प्राप्त हो सकती है। नौकरी के क्षेत्र में उच्च पदाधिकारियों के असहयोग के कारण हानि हो सकती है। प्रगति में रूकावट आएगी। आय स्थान पर पूर्ण दृष्टि के कारण आय में कमी तथा धन हानि हो सकती है।

 16 जुलाई से 20  जुलाई तक सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन अशांत रहेगा। कार्य एवं कार्य क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
 20 जुलाई से 3 अगस्त तक सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शनि है। इस अवधि में यात्रा हो सकती है। यात्रा में अपव्यय एवं शारीरिक कष्ट हो सकता है। बड़े भाई को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
 3 अगस्त से 17 अगस्त तक सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस अवधि में माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद रहेगा। संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मानसिक भय विशेष रुप से उत्पन्न होगा।

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