सूर्य का मेष राशि में गोचर- 13अप्रैल 2020 – Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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सूर्य का मेष राशि में गोचर- 13अप्रैल 2020

सूर्य सिद्धान्त के अधिष्ठाता भगवान सूर्य अपनी गत्यात्मक अवस्था में मेष  राशि में प्रवेश कर रहे है।

13 अप्रैल 2020  को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा और 14 मई  2020 तक मेष राशि में रहेगा:-

भुवन भास्कर भगवान सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं उपनिषदों में भगवान सूर्य के तीन रूपों का विवेचन हुआ-
1-निर्गुण-निराकार 2-सगुण-निराकार 3-सगुण-साकार
छांदोपनिषद में सूर्य को ब्रह्म की संज्ञा दी गयी,”आदित्यम् ब्रह्मेति ”।
भगवान सूर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया कि-

“ॐ चित्रन् देवानामुदगादनीकन् चक्षुर्मित्रस्य वरूणस्याग्ने:।
आप्रा द्यावापृथिवी अंतरिक्षम् सूर्य आत्मा जगतस्तथुषश्च॥”
अर्थात जो तेजोमय किरणों के पुंज हैं,मित्र,वरुण तथा अग्नि आदि देवताओं एवं समस्त विश्व के प्राणियों के नेत्र हैं और स्थावर-जंगमात्मक समस्त जीवनिकाय के अन्तर्यामी आत्मा हैं,वे भगवान सूर्य आकाश,पृथिवी और अन्तरिक्ष लोक को अपने प्रकाश से पूर्ण करते हुए आश्चर्य रूप से उदित हो रहे हैं।
वशिष्ठ जी ने भी प्रार्थना करते हुए कहा कि,”जो ज्ञानियों के अंतरात्मा,जगत को प्रकाशित करने वाले,संसार के हितैषी,स्वयम्भू तथा सहस्त्र उद्दीप्त नेत्रों से सुशोभित हैं,उन अमित तेजस्वी सुर श्रेष्ठ भगवान सूर्य को नमस्कार है ।
आज संसार को प्रकाशित करने वाले तेजोमय,हितैषी, ग्रहों के राजा सूर्य मेष  राशि में गमन कर रहे हैं,आइये जाने सूर्य का पारगमन मेष राशि में किस प्रकार के फल को प्रदान करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-पंचमेश सूर्य की गोचर से प्रथम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में विद्या एवं संतान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। मन के प्रतिकूल परिस्थिति होने के कारण स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। गृहस्थी संचालन के लिए यह कार्य करने के लिए संचित धन से खर्च करना पड़ेगा। यात्रा में भी व्यय होगा। यात्रा भी अधिक होगी। स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा। दांपत्य जीवन में भी कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। मित्रों एवं स्वजनों से विवाद के कारण मानसिक कष्ट रहेगा।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त नहीं होगा। जिसके कारण कठिन परिश्रम के होते हुए भी मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। धार्मिक कार्य में रुचि नहीं रहेगी।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। स्त्री वर्ग से विरोध का सामना करना पड़ेगा।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में कार्य में सफलता प्राप्त होगी परंतु परिस्थिति अनुकूल न होने के कारण स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। जीवनसाथी को ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- चतुर्थेश सूर्य की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में धन का अपव्यय होगा। लंबी यात्रा हो सकती है। ज्वर आदि के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्र भी शत्रुवत् व्यवहार करेंगे।नेत्र विकार से भी कष्ट हो सकता है। भूमि मकान आदि के कारण कुटुंब में विवाद हो सकता है। पेट के रोग से भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। सरकारी कार्य में भी हानि होगी।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वायुजनित रोग या वात रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। त्वचा से संबंधित रोग से भी कष्ट की संभावना हो सकती है।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। वाहन आदि पर व्यय होगा। शत्रुओं में वृद्धि होगी। शत्रु के बढ़ते प्रभाव के कारण मन अशांत रहेगा।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में सरकारी कर्मचारियों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। जिसके कारण धन हानि तथा सुख में कमी आ सकती है।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन-  तृतीयेश सूर्य की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में मान सम्मान में वृद्धि होगी। रोग से छुटकारा मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्यक्षेत्र में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी। उच्च पद की प्राप्ति भी हो सकती है। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। परिवार में मांगलिक एवं धार्मिक कार्य होंगे। राजकीय क्षेत्र से भी मान सम्मान प्राप्त होगा।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में आध्यात्मिक क्षेत्र में विशेष उन्नति प्राप्त होगी। धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी तथा धार्मिक कार्य में व्यय होगा।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में मन प्रसन्न रहेगा। विद्या एवं संतान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी ।आमोद प्रमोद तथा भोग विलास में व्यय होगा। लंबी यात्रा भी हो सकती है। यात्रा सुखद रहेगी।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में मित्रों का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। आय में मनोनुकूल वृद्धि होगी। समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- द्वितीयेश सूर्य की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। संचित धन में वृद्धि होगी तथा कुटुंब का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। उच्च पदाधिकारी तथा समाज में सम्मानित लोगों से संबंध स्थापित होंगे। उच्च पदाधिकारियों के सहयोग से पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में राजनीति से संबंधित लोगों से संबंध बनेंगे तथा इनसे लाभ भी मिलेगा। इन के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में भूमि वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। आय एवं संचित धन में वृद्धि होगी। स्श्री वर्ग का सहयोग मिलेगा।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में जिस कार्य को आरंभ करेंगे उसमें सफलता प्राप्त होगी। राजकीय कोष से धन की प्राप्ति होगी तथा पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। कार्य में अधिकता रहेगी।

 

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- लग्नेश सूर्य की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में भाग्य का सुख प्राप्त होगा परंतु धार्मिक कार्य में रुचि नहीं रहेगी। जिसके कारण पुण्य की हानि होगी। मित्र तथा भाई बंधुओं से विरोध या वैचारिक मतभेद हो सकता है। अपने प्रिय लोगों से विरह भी हो सकता है। पिता का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। झूठा आरोप भी लग सकता है।परिश्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। पराक्रम में हानि हो सकती है।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी तथा अकस्मात भाग्य में वृद्धि होगी।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में मित्रों से अनबन रहेगी। आलस्य की अधिकता के कारण कार्य में हानि हो सकती है। स्त्री वर्ग या स्त्री मित्र के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। पराक्रम में हानि हो सकती है। स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। क्रोध की अधिकता के कारण कार्य में हानि हो सकती है। इस अवधि में क्रोध पर नियंत्रण रखने में ही भलाई है।

 

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- व्ययेश सूर्य की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप संचित धन की हानि होगी। कुटुंब में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। लड़ाई झगड़ा एवं विवाद के कारण अपव्यय हो सकता है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। ज्वर एवं ताप से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। सरकार एवं अधिकारी वर्ग का भय एवं उनकी नाराजगी के कारण धन हानि हो सकती है।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में बवासीर आदि गुदा रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। पारिवारिक विवाद से धन हानि हो सकती है। मन अशांत रहेगा यात्रा भी हो सकती है।
27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त नहीं होगा। कठिन परिश्रम से ही कार्य में सफलता प्राप्त होगी। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। आकस्मिक धन हानि हो सकती है।
10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र मे रहेगा।  इस नक्षत्र का  स्वामी सूर्य है। इस अवधि में अच्छे एवं बुरे संचित कर्मों का फल प्राप्त होगा। भय (जुर्माना) एवं मुकदमा आदि में व्यय हो सकता है। सरकारी कर्मचारियों के विरोध के कारण कार्य में हानि हो सकती है।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला-आयेश सूर्य की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में रोजगार के द्वारा आय में वृद्धि हो सकती है परंतु स्वभाव में क्रोध की अधिकता के कारण हानि भी हो सकती है। अतः इस अवधि में क्रोध पर नियंत्रण रखें। समाज में मान सम्मान की कमी के कारण मन में क्लेश का अनुभव होगा। दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा, दांपत्य जीवन में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा। पेट या गुदा रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वायु जनित अर्थात वात रोग या गुदा रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी का भी स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। व्यवसाय या कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है।
27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति न होने से मन अशांत रहेगा। जीवनसाथी को मधुमेह एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।  पिता के व्यवसाय से आय में वृद्धि हो सकती है।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में भी मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। राजकीय कर्मचारियों या अधिकारियों से विवाद के कारण हानि हो सकती है।

 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- दशमेश सूर्य की गोचर से छठवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा तथा मन प्रसन्न रहेगा। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। शोक मोह आदि विकलता उत्पन्न करने वाले भावों का नाश होगा अर्थात चित्त स्वस्थ रहेगा। सभी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। राजकीय कोष से भी धन की प्राप्ति होगी। सरकारी कार्य एवं नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी तथा पराक्रम के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। पेट के रोग से कष्ट हो सकता है नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में बाहरी स्थान से लाभ मिलेगा। लंबी यात्रा हो सकती है। यात्रा सुखदाई रहेगी। आमोद प्रमोद एवं विलास में व्यय होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पिता के द्वारा या पिता के व्यवसाय से धन की प्राप्ति होगी। कार्यक्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त होगी। बढ़ते प्रभाव के कारण शत्रु संधि करने के लिए विवश होंगे। नौकरी के क्षेत्र में कार्य की अधिकता रहेगी तथा मान सम्मान प्राप्त होगा।

 

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- भाग्येश सूर्य की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। मोह आदि के कारण मानसिक विकलता रहेगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारियों से विवाद के कारण कार्य में हानि हो सकती है। अति आत्मविश्वास के कारण प्रगति में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। पिता के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। ज्वर आदि के कारण पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में निर्णायक क्षमता में कमी आएगी| संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में भी रुकावट आ सकती है।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। प्रतिस्पर्धा के कारण आय में कमी आ सकती है। आलस्य की अधिकता के कारण कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।
10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में कार्य में सफलता की प्राप्ति हो सकती है परंतु अहंकार के कारण हानि भी हो सकती है। उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण कार्य में हानि हो सकती है। इस अवधि में अहंकार एवं विवाद से बचकर रहें।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- अष्टमेश सूर्य की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में सुख में हानि होगी तथा सुख से संबंधित कार्यों में बाधा उत्पन्न होगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रोग में वृद्धि होगी। भूमि वाहन आदि से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होंगी। भूमि विवाद के कारण परिवार में वैमनस्यता बढ़ेगी तथा मन अशांत रहेगा। माता-पिता को भी ज्वर एवं हड्डी से संबंधित रूप से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वायु विकार के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। मान-सम्मान में कमी आएगी।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में आलस्य के कारण कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है। लोगों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है तथा वाहन आदि के सुख में कमी रहेगी।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। मानहानि की संभावना रहेगी। राजकीय क्षेत्र या नौकरी के क्षेत्र में भी हानि हो सकती है। दांपत्य जीवन  भी सुखमय नहीं रहेगा। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ- सप्तमेश सूर्य की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में नए स्थान की प्राप्ति होगी। व्यवसाय के माध्यम से आय में वृद्धि होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। मित्रों एवं छोटे भाई बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। शत्रुओं का नाश होगा तथा उन पर विजय प्राप्त होगी। शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। समाज में प्रतिष्ठित लोग तथा उच्च पदाधिकारियों से संबंध बनेंगे। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

 13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतू है। इस अवधि में मित्रों के द्वारा या मित्रों के सहयोग से कार्य में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी। आध्यात्मिक क्षेत्र में विशेष रुचि उन्नति होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिसके प्रभाव से कम परिश्रम से ही कार्य की सिद्धि होगी। वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में नए स्थान या उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। छोटे भाई को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन- षष्ठेश सूर्य की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में संचित धन में हानि हो सकती है। वाणी दोष अर्थात वाणी में कठोरता के कारण परिवार में विवाद हो सकता है। मनुष्य का स्वभाव जिद्दी हो सकता है। लोग धोखा देकर अपना कार्य सिद्ध कर लेते हैं । दुष्ट एवं बुरे कर्म करने वालों से संबंध बनते हैं तथा व्यक्ति का स्वभाव भी धूर्तता एवं नीचता की तरफ अग्रसर होता है। मित्रों एवं संबंधियों से विवाद हो सकता है।

13 अप्रैल से 27 अप्रैल तक सूर्य अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में बंधु बांधवो से विवाद के कारण धन हानि हो सकती है। मन अशांत रहेगा।
 27 अप्रैल से 10 मई तक सूर्य भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में दांपत्य सुख में कमी आ सकती है। मित्रों से विवाद हो सकता है। रोजगार में हानि हो सकती है।
 10 मई से 14 मई तक सूर्य कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में ज्वर एवं नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है। शरीर एवं सर में भी पीड़ा हो सकती है। शत्रुओं के कारण धन हानि हो सकती है।

 

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