जन्मराशि और नामराशि की प्रधानता

:-जन्मराशि और नामराशि की प्रधानता  निर्णय:-

ज्योतिष के विभिन्न प्रकरणों में  जैसे-राशिफल,गोचर,गृहारम्भ,गृहप्रवेश आदि  एवं अन्य कार्यों में यह द्वन्द की स्थिति रहती है कि जन्मराशि का विचार करें या नाम राशि का। इसी द्वन्द का निवारण इस श्लोक के माध्यम से हो जाता है।

जन्मराशि की प्रधानता हेतु-

“विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रह गोचरे,जन्मराशि प्रधानत्वं नामराशिम् न चिन्तयेत्।”,अर्थात् विवाह,सभी मांगलिक कार्य,यात्रा,ग्रह गोचर विचार करने में जन्मराशि की प्रधानता है।जन्म के समय आपकी कौन सी राशि थी,इसका निर्णय विद्वान ब्राह्मण से जन्म तिथि और जन्मसमय और स्थान को बताकर ज्ञात कर लेना चाहिये।

नामराशि की प्रधानता:-

“देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके,नामभाच्चिन्तयेत्सर्वं यदि जन्म न ज्ञायतते यदा।”

अर्थात् देश,ग्राम,गृह,युद्ध,सेवा,व्यवहार आदि के पक्ष का विचार नामराशि के आधार पर करना चाहिये।