भारद्वाज गोत्र के प्रवरादि

:-भारद्वाज गोत्र के सम्बन्ध में जानकारी:-

१-भारद्वाज गोत्र के मूल गांव बड़गों,शरारि,बढ़या,रमवापुर,बदगदी,मझौवां,जलालपुर,बड़मैया,पटवरियां,मुड़वरियाँ,सिसवां,पुरैना तथा कौसड़,बलुवा,बाबू मठियारी,पगड़ों,मलौली हैं।

२-भारद्वाज गोत्र में द्विवेदी,पाण्डेय,चतुर्वेदी,पाठक,मिश्र तथा उपाध्याय वंश के ब्राह्मण होते  है। 

३-भारद्वाज गोत्र के जातकों का वेद यजुर्वेद है।

४-भारद्वाज गोत्र के जातकों का उपवेद धनुर्वेद है।

५-भारद्वाज गोत्र के जातकों की शाखा माध्यन्दिनीय तथा सूत्र कात्यायन है।

६-भारद्वाज गोत्र के जातकों का पाद दक्षिण पाद है।

७-भारद्वाज गोत्र के जातकों के देवता शिव हैं।

८-भारद्वाज गोत्र के जातकों का तीन प्रवर है। इनके मुख्य ऋषि अंगिरस,बार्हस्पत्य तथा भारद्वाज हैं।

९-द्विवेदी वंश के ब्राह्मणों का स्थान –बडगों,शरारि,बढ़ैया,मझौवा,रमवापुर,धाराधरी,जलालपुर,रमलपुर,बड़मईया,पटवरिया,कुंडवलिया,नकाही,सौरी,सेंधवा,बेलवा,टंटनवापुर,गुदभापुर,पारा,बरईपट्टी,सेजरूआ,बड़हरा,उचेला,छपहा,बिनबेदी वाले है।

१०-पाण्डेय वंश के ब्राह्मणों का स्थान- सिसवां,पुरैना,बलुवा,बाबू मठियारी,पगड़ों हैं।

११-चतुर्वेदी वंश के ब्राह्मणों का स्थान- बलुवा,बाबू मठियारी और मलौली हैं।