संतान प्राप्ति में बाधक शाप। - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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संतान प्राप्ति में बाधक शाप।

:-पुत्र प्राप्ति में बाधक शाप :-

सृष्टि के क्रम में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के विस्तार का क्रम मनु और सतरूपा से प्रारम्भ होकर वर्तमान तक गतिमान है। प्रत्येक मनुष्य की नैसर्गिक ईच्छा होती है कि उसे पुत्र प्राप्तहो जो उसके वंश वृक्ष की श्रंखला को आगे बढ़ाये।हालाँकि आज के वर्तमान परिवेश मे पुत्र और पुत्री में भेद उचित नहीं है परन्तु पुत्री युक्त होते हुए भी मनुष्य को एक पुत्र की प्राप्ति की ईच्छा कहीं न कहीं दबी रहती है। शास्त्रों में भी पुत्र की महिमा बताते हुए लिखा गया है की पुत्र हीं पिता और पूर्वजों को पुन्न नामक नरक से अपने श्राद्धादि और पिण्डदान इत्यादि के द्वारा पार करता है। शास्त्रों में तो यहा तक कहा गया है की पुत्र की प्राप्ति न होने पर सद्गति की प्राप्ति नहीं होती है।

पुत्र की प्राप्ति में न होने में मनुष्य के स्वयं के कुछ दुष्कर्म अर्थात पाप हीं जिम्मेदार होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सन्तान न होने का कारण क्या है इसको भी बताया गया है,आइये जाने सन्तान हानि  योग और इसे किस शाप के नाम से जानते हैं।

  1. यदि गुरु लग्न का स्वामी और सप्तम स्थान का स्वामी और पंचम स्थान का स्वामी ये सभी निर्बल हो तो सन्तान प्राप्ति में हानि होती है।
  2. यदि पुत्र कारक ग्रह गुरु एवं पंचम स्थान का स्वामी ग्रह निर्बल हों और पंचम भाव में सूर्य,मंगल और शनि बलवान होकर उपस्थित हो तो पुत्रहीन योग होता है।
  3. सर्पशाप से सन्तानहानि योग :-  पंचम भाव में राहु हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो तो सर्प शाप से पुत्र की प्राप्ति होने में बाधा होती है।
  4. पंचम भाव में शनि की उपस्थिति हो और उस पर चन्द्रमा की दृष्टि हो और पंचमेश राहु के साथ हो तो सर्प शाप से सन्तान हानि होती है।
  5. पुत्र कारक ग्रह राहु युक्त हो और पंचमेश बलहीन हो और लग्न का स्वामी मंगल से युक्त हो तो सर्पशापसे सन्तान हानि होती है।
  6. पुत्र कारक ग्रह मंगल युक्त हो और लग्न में राहु की उपस्थिति तथा पंचम स्थान का स्वामी त्रिक स्थान में हो तो सर्प सन्तान हानि का योग बनता है।
  7. पंचम स्थान में सूर्य,शनि,मंगल,राहु ,बुध और गुरु की उपस्थिति हो एवं पंचमेश और लग्नेश निर्बल हो तो सर्पशाप से सन्तान हानि का योग बनता है।
  8. लग्नेश या पुत्र कारक ग्रह राहु से युक्त और पंचमेश मंगल से उक्त हो तो सर्प शाप से सन्तान हानि का योग बनता है।

सर्प शाप की शांति कराकर संतान हानि के योग से बचा जा सकता है और पुत्र की प्राप्ति हो सकती है। सर्प शान्ति से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और वंश वृक्ष की वृद्धि करते हैं।

आगे के अंक में आप को अन्य शाप जिससे सन्तान हानि की सम्भावना संभव है,विचार कर प्रस्तुत किया जायेगा। प्रभु आप सभी लोगों पर कृपा की दृष्टि प्रदान करते रहें और आप सभी का कल्याण हो ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ…………………………………………………………

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