विवाह में नाड़ी एक नहीं हो क्यों?

:-विवाह में नाड़ी एक होने का फल:-

विवाह में वर और कन्या की एक नाड़ी नहीं होनी चाहिये क्यूँकि-

“एकनाड़ीस्थनक्षत्रे दम्पत्योर्मरणं ध्रुवम् ,सेवायां च भवेद् हानिर्विवाहे प्राणनाशनः।”

अर्थात स्त्री-पुरुष की एक नाड़ी हो तो निश्चय मरण,सेवा में हानि और विवाह में प्राण का नाश होता है।

नाड़ी आपस में एक होने का फल-

नाड़ी के तीन प्रकारआदि,मध्य और अन्त्य हैं,आइये जानते हैं कि तीनों नाड़ी परस्पर एक हो तो क्या फल होता है।

“आदिनाड़ी वरं हन्ति मध्य नाड़ी च कन्यकाम् ,अन्त्यनाड्यां द्वयोर्मृत्युर्नाडीदोषं त्यजेत्बुधः।”

आदि नाड़ी वर-कन्या की परस्पर एक होने पर वर की,मध्य नाड़ी वर-कन्या की परस्पर एक होने पर कन्या और अन्त्य नाड़ी परस्पर एक होने पर वर-कन्या दोनों का नाश करती है।

अतएव विवाह जैसे पुनीत यज्ञ में विद्वान ब्राह्मण से अष्टकूट का मिलान एवं उनमें प्राप्त वैषम्यता को दूर करने के मार्ग का अनुसरण करके यज्ञ को पूरा करना चाहिये।