बुध का सिंह राशि में संचार-17-अगस्त-2020 - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
सूर्य का सिंह राशि में संचार – 16 अगस्त 2020
August 16, 2020
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बुध का सिंह राशि में संचार-17-अगस्त-2020

कालज्ञानम ग्रहाधीनम , ग्रहा: कर्मफलप्रदा:।सृष्टिरक्षणसंहारा: , सर्वे चापिग्रहनुगा:॥

सब कुछ ग्रहों के अधीन है तो हम ग्रह नक्षत्र का परिज्ञान करके अच्छे कार्य मे क्यूँ न संलग्न हो।ग्रहों मे सूर्य चंद्रमा को राजा तो बुध को युवराज की संज्ञा दी गयी है,बुध सम स्वभाव का ग्रह है और वह पापग्रहों के साथ होकर उनके अनुसार आचरण करता है ,साथ ही शुभ ग्रहों के साथ होकर शुभ फल की प्राप्ति कराता है।इसी क्रम को ध्यान मे रखकर बुध का सिंह राशि मे प्रवेश किस प्रकार से विभिन्न राशि वालों को प्रभावित करेगा विवेचन किया गया है,आइये पढ़ें और जाने बुध का सिंह  राशि मे संचार [ Mercury  Transits in Leo ]जीवन मे किस प्रकार के संचार संचारित करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातक के लिए तृतीययेश एवंं षष्ठेश बुध की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। आलस्य की अधिकता के कारण आय में हानि हो सकती है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। संतान से वैचारिक मतभेद हो सकता है। जीवनसाथी से भी मतभेद हो सकता है। कार्य में मनोवांछित सफलता की प्राप्ति ना होने से मन अशांत रहेगा।

17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। परंतु संतान के व्यवहार के कारण मानसिक कष्ट हो सकता है। शत्रुओं के कारण कार्य में हानि हो सकती है।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में स्त्री मित्र के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। साझेदारी के व्यवसाय या मित्र के कारण व्यवसाय में हानि का योग है।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में संतान से मधुर संबंध रहेंगे, परंतु संतान को कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी।
 

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष-द्वितीयेश एवं पंचमेश बुध की गोचर  से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में वाणी एवं विद्या के प्रभाव से समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन एवं मकान आदि का सुख प्राप्त होगा। माता का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। संचित धन में वृद्धि होगी। कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में भूमि एवं मकान आदि में वृद्धि होगी अर्थात जमीन एवं मकान खरीद सकते हैं।
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। ऐश्वर्या में वृद्धि होगी। समाज में सम्मानित व्यक्तियों से संबंध स्थापित होंगे एवं उनका सहयोग प्राप्त होगा।
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। उच्च पदस्थ लोगों का सहयोग प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- लग्नेश एवं चतुर्थेश बुध की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में अकारण भय मन में रहेगा। पुरुषार्थ की कमी के कारण कार्य में मनवांछित सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।छोटे भाई बहन से वैचारिक मतभेद रहेगा। नए मित्र बन सकते हैं। भूमि एवं मकान आदि के कारण बंधु जनों से विवाद हो सकता है।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्रों के कारण कार्य में हानि हो सकती है। मन में द्वंद बना रहेगा।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस क्षेत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में मनोरंजन कार्य में व्यय हो सकता है। यात्रा भी हो सकती है। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। आलस्य की अधिकता के कारण हानि भी हो सकती है। अतः आलस्य से दूर रहे।
 
 31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु छोटे भाई बहनों मित्रों से मतभेद हो सकता है।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- व्ययेश एवं तृतीयेश बुध की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में बाहरी स्थान के सहयोग से संचित धन में वृद्धि होगी। बंधु बंधुओं का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। पराक्रम में वृद्धि होगी। पुरुषार्थ के द्वारा विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। धार्मिक यात्रा या मांगलिक कार्य में व्यय हो सकता है। नए वस्त्र एवं आभूषणों की प्राप्ति हो सकती है।

17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वाणी में ओज रहेगा। वाणी के प्रभाव से समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा तथा पुरुषार्थ में वृद्धि होगी।

 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा एवं वाहन आदि में तथा आमोद प्रमोद में व्यय होगा। बाहरी स्थानों से आय में वृद्धि हो सकती है। स्वादिष्ट व्यंजनों की प्राप्ति होगी।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में राजकीय कोष से धन की प्राप्ति होगी। वाणी के प्रभाव से समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी नेत्र विकार एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- आयेश एवं द्वितीयेश बुध की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखें। अप्रिय शब्दों के प्रयोग के कारण धन हानि एवं बंधुओं से विवाद हो सकता है। विवाद के कारण बंधन का भी भय रहेगा। मान-सम्मान की हानि भी हो सकती है। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है या वैचारिक मतभेद के कारण दांपत्य सुख में कमी रहेगी। व्यवसाय में स्पर्धा के कारण हानि हो सकती है।

17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में त्वचा से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अशांति रहेगी। जीवनसाथी को वातजनित रोग से कष्ट हो सकता है।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में आलस्य की अधिकता रहेगी। जिसके कारण कार्य में हानि हो सकती है। मित्रों से मतभेद हो सकता है।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। व्यवसाय में लाभ तथा संचित धन में वृद्धि होगी। परंतु जीवन साथी को ज्वर आदि से कष्ट हो सकता है।
 

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- दशमेश एवं लग्नेश बुध की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। सहकर्मियों से विवाद के कारण कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है। अतः इस अवधि में सबसे मधुर संबंध बनाकर रखें। शत्रु के कारण भी हानि हो सकती है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। उदर विकार आत एवं पाचन क्रिया से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में भी हानि हो सकती है।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी। परंतु भौतिक सुख में कमी का आभास होगा। यात्रा स्थान परिवर्तन भी हो सकता है।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में स्वास्थ्य से संबंधित समस्या आ सकती है। बंधु बंधवो से मतभेद हो सकता है। धार्मिक एवं मांगलिक कार्य में व्यय होगा। धर्म में रुचि बढ़ेगी।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। शत्रुओं के कारण अपव्यय हो सकता है। वाद विवाद से दूर रहें। नेत्र विकार एवं ज्वर आदि से कष्ट हो सकता है। राजकीय कार्य या नौकरी के क्षेत्र में बाहरी स्थान के सहयोग से सफलता प्राप्त होगी।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए नवमेश एवं व्ययेश बुध की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। कम परिश्रम से ही कार्य में पूर्ण सफलता की प्राप्ति होगी। बाहरी स्थान के संबंध से भी आय में वृद्धि हो सकती है। विद्या के क्षेत्र में मनोवांछित सफलता की प्राप्ति होगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। विद्या एवं संतान के सहयोग से भी आय में वृद्धि होगी। यात्रा भी हो सकती है।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में शुभ कार्यों में प्रवृत्ति बढ़ेगी। मित्र एवं बंधु बांधवो से संबंध मधुर रहेंगे। इनका सहयोग एवं सुख प्राप्त होगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी।
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। विभिन्न स्रोतों से आय में वृद्धि होगी। निर्माणकारी कार्य या मांगलिक कार्य में व्यय होगा।
 
 31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति होगी तथा ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट भी हो सकता है।
 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं आयेश बुध की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। सभी प्रकार के सुख की प्राप्ति होगी। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। माता-पिता का सुख प्राप्त होगा। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी तथा जनहित के कार्य में रुचि बढ़ेगी। भूमि वाहन मकान आदि का सुख प्राप्त होगा।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। उच्च पदाधिकारियों एवं समाज में सम्मानित लोगों से संबंध बनेंगे तथा उनका सहयोग प्राप्त होगा।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में व्यवसाय में वृद्धि होगी। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। सामाजिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। यात्रा या भोग विलास की वस्तुओं में व्यय होगा।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। सरकारी कर्मचारियों के सहयोग से कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। पिता के व्यवसाय में वृद्धि होगी या पिता का सहयोग प्राप्त होगा। पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- धनु राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए सप्तमेश एवं दशमेश बुध की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में मित्रों के कारण कार्य में हानि हो सकती है। धर्म की बातों में बुराई ढूंढने की प्रवृत्ति में वृद्धि होगी। व्यवसाय में लाभ मिलेगा। परंतु दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। पिता के स्वास्थ्य के प्रति चिंता रहेगी। कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। छोटे भाई बहन एवं बंधु बांधवों से विरोध का सामना करना पड़ेगा।

17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में धार्मिक कार्य में विशेष रूचि नहीं रहेगी। इस अवधि में मन को एकाग्र करने से आध्यात्मिक क्षेत्र में विशेष सफलता की प्राप्ति हो सकती है।
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। कार्य की सफलता में विघ्न बाधाएं आ सकती हैं।शत्रुओं में वृद्धि होगी तथा शत्रुओ के कारण हानि हो सकती है।
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में कार्य में मनवांछित सफलता प्राप्त होगी परंतु छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्रों से वैचारिक मतभेद रहेगा।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- षष्ठेश एवं भाग्येश बुध की गोचर से आठवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में आकस्मिक धन लाभ होगा। कुटुंब एवं बंधु बांधवो का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। परिश्रम के अनुसार ही कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। ज्वर एवं ताप आदि से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। व्यवसाय के माध्यम से संचित धन में वृद्धि होगी। परंतु जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में गुप्त इंद्रियों से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। संचित धन में वृद्धि होगी। धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी तथा आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में विद्या एवं संतान का सुख प्राप्त होगा एवं संतान के सहयोग से संचित धन में वृद्धि होगी। नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। सरकारी कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त होगा।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में आकस्मिक धन की प्राप्ति होगी। शेयर बाजार में निवेश करने से लाभ मिलेगा। नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ- कुंभ राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए पंचमेश एवं अष्टमेश बुध की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में शरीर अस्वस्थ एवं मन अशांत रहेगा। दांपत्य जीवन में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा। जीवनसाथी को उदर विकार से शारीरिक कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। व्यवसाय में भी हानि हो सकती है। इस अवधि में यात्रा से दूरी बनाकर रखें। यात्रा में हानि हो सकती है। पारिवारिक विवाद के कारण मन में अशांति रहेगी।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में मित्र तथा छोटे भाई बहन से वैचारिक मतभेद रहेगा। चेहरे पर तेज की कमी रहेगी। शरीर में दर्द के कारण कष्ट होगा। स्पर्धा के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में परिश्रम के अनुसार कार्य में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। आलस्य की अधिकता रहेगी। कठिन परिश्रम से ही कार्य में सफलता मिलेगी। माता को कष्ट हो सकता है।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में व्यवसाय में आकस्मिक लाभ मिलेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। सिरदर्द एवं ताप से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन- मीन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए चतुर्थेश एवं सप्तमेश बुध की गोचर से छठे भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में शत्रुओं पर सरलता से विजय प्राप्त होगी। बाहरी स्थान के सहयोग से व्यापार में वृद्धि होगी। भूमि वाहन आदि के क्रय में व्यय होगा। निर्माणकारी कार्य तथा धार्मिक कार्य में व्यय होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। ताप आदि से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। माता भूमि वाहन एवं मकान आदि का सुख प्राप्त होगा।

 
17 अगस्त से 23 अगस्त तक बुध मघा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा तथा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। परिवार के साथ यात्रा में भी व्यय हो सकता है। संचित धन में वृद्धि होगी।
 
23 अगस्त से 31 अगस्त तक बुध पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। साझेदारी के व्यवसाय में लाभ मिलेगा। मित्रों का सहयोग एवं सुख प्राप्त होगा।
 
31 अगस्त से 2 सितंबर तक बुध उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे तथा कार्य की सफलता में सहायक सिद्ध होंगे। ननिहाल पक्ष का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। राजकोष से भी धन की प्राप्ति हो सकती है।

 

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