बुध का मेष राशि में संचार-03-मई-2019

कालज्ञानम ग्रहाधीनम , ग्रहा: कर्मफलप्रदा:।सृष्टिरक्षणसंहारा: , सर्वे चापिग्रहनुगा:॥

सब कुछ ग्रहों के अधीन है तो हम ग्रह नक्षत्र का परिज्ञान करके अच्छे कार्य मे क्यूँ न संलग्न हो।ग्रहों मे सूर्य चंद्रमा को राजा तो बुध को युवराज की संज्ञा दी गयी है,बुध सम स्वभाव का ग्रह है और वह पापग्रहों के साथ होकर उनके अनुसार आचरण करता है ,साथ ही शुभ ग्रहों के साथ होकर शुभ फल की प्राप्ति कराता है।इसी क्रम को ध्यान मे रखकर बुध का मेष राशि मे प्रवेश किस प्रकार से विभिन्न राशि वालों को प्रभावित करेगा विवेचन किया गया है,आइये पढ़ें और जाने बुध का मेष राशि मे संचार जीवन मे किस प्रकार के संचार संचारित करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातक के लिए तृतीयेश एवं षष्ठेश बुध की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में मित्र एवं भाई बंधुओं से विरोध का सामना करना पड़ेगा। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे जिसके कारण मन अशांत रहेगा। विवाद के कारण धन हानि हो सकती है। वाणी में कठोरता या अप्रिय वाणी के कारण मान-सम्मान में हानि हो सकती है। दूसरों की निंदा या बुराई में समय व्यतीत होगा। स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा। इस अवधि में विवाद के कारण बंधन एवं धन हानि हो सकती है।

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में आकस्मिक घटना अर्थात चोट आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है परंतु संतान के लिए समय अनुकूल है। संतान की उन्नति या संतान को सफलता मिल सकती है।

10 मई से 17 मई तक बुद्ध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में भोग विलास में व्यय होगा। स्त्री मित्र के कारण मान-सम्मान में हानि हो सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा।

17 मई से 18 मई तक बुद्ध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में कार्य में सफलता विलंब से प्राप्त होगी। यात्राएं अधिक होंगी। स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा। कार्य में मनोनुकूल सफलता ना मिलने से स्वाभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष-द्वितीयेश एवं पंचमेश बुध की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में जातक को पराजय का सामना करना पड़ेगा। संचित धन की हानि होगी तथा संतान से भी वैचारिक मतभेद रहेगा। विद्या के क्षेत्र में भी मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। कुटुंब तथा संबंधियों से भी संबंध मधुर नहीं रहेगा। मन अशांत रहेगा। विवाद के कारण कार्य में हानि होगी।
 

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है। स्थान परिवर्तन हो सकता है। मन अशांत रहेगा। 

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में भोग विलास में व्यय होगा। मित्रों की संख्या में वृद्धि होगी। आय में वृद्धि होगी। परंतु अंतोतगत्वा धनहानि ही होगी।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। सुख की हानि होगी। ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्र भी शत्रुवत व्यवहार करेंगे।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- लग्नेश एवं चतुर्थेश बुध की की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में धन में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। भूमि वाहन एवं मकान आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। संतान के लिए भी समय अनुकूल है। बुद्धि के प्रभाव से प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी। जिससे मन प्रसन्न रहेगा। विद्या एवं संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। शुभ कार्य में रूचि बढ़ेगी।

3 मई से 10 मई  तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में विभिन्न स्रोत से आय में वृद्धि होगी। शेयर बाजार में निवेश करने से भी लाभ मिलेगा।

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में सभी कार्य में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी। स्त्री वर्ग का सहयोग प्राप्त होगा। बाहरी स्थानों से आय में वृद्धि होगी। विद्या एव संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। आध्यात्मिक एवं मांगलिक कार्य में व्यय होगा। राजकीय क्षेत्र से भी धन की प्राप्ति हो सकती है। प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- व्ययेश एवं तृतीयेश बुध की गोचर से दसवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी। नए पद की प्राप्ति होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी तथा शत्रु पराजित होंगे। जिससे मन प्रसन्न रहेगा। भूमि वाहन एवं मकान आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। जनहित के कार्य में भी समय व्यतीत होगा। छोटे भाई बहन एवं मित्रों का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।
 

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में राजनीति से संबंधित लोगों से संबंध स्थापित होंगे तथा कार्य की सफलता में इनका सहयोग प्राप्त होगा।  

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में आलस्य की अधिकता रहेगी। वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में उच्च पदाधिकारियों तथा समाज के प्रतिष्ठित लोगों से संबंध बनेंगे। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी तथा पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा।

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- आयेश एवं द्वितीयेश बुध की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में संचित धन एवं आय में वृद्धि होगी। परंतु नाना प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। कार्य में सफलता प्राप्त होगी परंतु विघ्न बाधाएं भी आएंगी। धर्म की बात में बुराई निकालने या ढूंढने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। मानहानि की संभावना रहेगी। संबंधियों मित्रों तथा भाई बहन से वैचारिक मतभेद रहेगा। इनसे विवाद भी हो सकता है।

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में संतान के भाग्य में वृद्धि होगी। मित्रों से मधुर संबंध बनाकर रखने में भलाई है। मित्रों के विरोध के कारण धन हानि हो सकती है।

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में लंबी यात्रा में व्यय हो सकता है। मांगलिक या धार्मिक कार्य में व्यय होगा। आलस्य के कारण कार्य में हानि हो सकती है। छोटे भाई बहन के विरोध के कारण कार्य में हानि हो सकती है।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। झूठा आरोप भी लग सकता है। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने से मन अशांत रहेगा।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- दशमेश एवं लग्नेश बुध की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। संतान की उन्नति से संबंधित शुभ संदेश की प्राप्ति होगी। संचित धन में आकस्मिक वृद्धि होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी तथा प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। राजकीय कोष से भी आय में वृद्धि हो सकती है। कुटुंब का सहयोग एवं सुख प्राप्त होगा।

3 मई से 10 मई तक तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में लंबी यात्रा या विदेश की यात्रा हो सकती है। यात्रा में व्यय होगा।

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में उन्नति होगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। भोग विलास की सामग्री की प्राप्ति होगी। सभी प्रकार के कष्ट दूर होंगे। 

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। विवाद से बच कर रहे विवाद के कारण धन हानि हो सकती है।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए नवमेश एवं व्ययेश बुध की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। उदर विकार आत एवं लीवर से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य जीवन में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा। जीवनसाथी को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। यात्रा में व्यय होगा। यात्रा सुखदाई नहीं रहेगी। बाहरी स्थान के व्यवसाय में हानि हो सकती है।

 
3 मई से 10 मई तक तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में व्यवसाय में आकस्मिक लाभ हो सकता है। परंतु गुप्तइंद्रियों से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। स्त्री वर्ग से विवाद हो सकता है।

10 मई से 17 मई तक भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में स्त्री वर्ग के कारण समाज में मान हानि हो सकती है। मधुमेह आदि रोग से शारीरिक कष्ट सकता है। कठिन परिश्रम से कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में सर दर्द एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। बाहरी स्थान के व्यवसाय में हानि हो सकती है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। क्रोध के कारण या विवाद के कारण हानि हो सकती है। क्रोध पर नियंत्रण रखें।

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं आयेश बुध की गोचर से छठवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। ननिहाल पक्ष का सहयोग प्राप्त होगा। चाचा बुआ मामा आदि का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। शरीर स्वस्थ रहेगा। प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होने से मन प्रसन्न रहेगा।


3 मई से 10 मई  तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में शत्रुओं में वृद्धि होगी। परंतु शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। नेत्र विकार एवं पेट के रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में व्यवसाय से संबंधित या कार्य क्षेत्र से संबंधित कार्य हेतु लंबी यात्रा हो सकती है। आमोद प्रमोद में समय व्यतीत होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। राजकोष से भी आय की प्राप्ति होगी। सरकारी कार्य एवं नौकरी के क्षेत्र में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी तथा रोगों का नाश होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- धनु राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए सप्तमेश एवं दशमेश बुध की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में स्त्री एवं पुत्रों से कलह रहेगा। पिता को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। इस कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने से मन में अशांति रहेगी। आय के क्षेत्र में भी कमी रहेगी। दांपत्य जीवन में भी कटुता रहेगी। विद्या के क्षेत्र में भी निर्णायक क्षमता की कमी के कारण पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं होगी।

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में संतान को कष्ट हो सकता है। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त ना होने से कठिन परिश्रम के होते हुए भी कार्य क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।

 10 मई से 17 मई  तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में शत्रुओं में वृद्धि होगी। शत्रुओं के कारण या विवाद के कारण धन हानि हो सकती है।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।इस अवधि में मानसिक भ्रम उत्पन्न होगा। नौकरी के क्षेत्र में उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण हानि हो सकती है। संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- षष्ठेश एवं भाग्येश बुध की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में धन की प्राप्ति होगी। माता का सुख प्राप्त होगा। भूमि वाहन मकान आदि का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। समाज में सम्मानित एवं विद्वान लोगों से संबंध बनेंगे। उच्च पदाधिकारियों के सहयोग से कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे तथा कार्य की सफलता में सहायक सिद्ध होंगे।

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। तीर्थ यात्रा हो सकती है। धार्मिक कार्य में व्यय होगा। घर में मांगलिक एवं धार्मिक कार्य हो सकता है।

 10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में बुद्धि के प्रभाव से विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। नौकरी के क्षेत्र में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। प्रशासनिक क्षेत्र में मान सम्मान मे वृद्धि होगी। जनसंपर्क के कार्य में रूचि बढ़ेगी।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र मे रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में भूमि वाहन से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। माता पिता को ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। परंतु कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ- कुंभ राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए पंचमेश एवं अष्टमेश बुध की गोचर से तीसरे भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शत्रुओं से भय रहेगा। पराक्रम में कमी रहेगी। भाई बंधुओं से विरोध हो सकता है। नए मित्र बनेंगे परंतु पुराने मित्रों से मतभेद रहेगा। स्वास्थ्य भी अनुकूल नहीं रहेगा। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त ना होने से कठिन परिश्रम से ही कार्य में सिद्धि प्राप्त होगी। संतान से भी वैचारिक मतभेद हो सकता है।

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में मित्रों के सहयोग से कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति हो सकती है। धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ेगी।

10 मई से 17 मई तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। इस अवधि में छोटी बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। आलस्य की अधिकता रहेगी। जिसके के कारण कार्य में हानि हो सकती है।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र मे रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में व्यवसाय में हानि हो सकती है। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। छोटे भाई बहन को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन- मीन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए चतुर्थेश एवं सप्तमेश बुध की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में धन लाभ होगा। नवीन वस्त्र एवं आभूषण की प्राप्ति होगी। मन एवं बुद्धि के प्रभाव से समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। विद्या के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। वाणी के प्रभाव से संचित धन में वृद्धि होगी। पठन-पाठन में भी रुचि उत्पन्न होगी।

3 मई से 10 मई तक बुध अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी केतु है। इस अवधि में वाणी सिध्द होगी। इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखें। धन में वृद्धि होगी। नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है।

10 मई से 17 मई  तक बुध भरणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र है । इस अवधि में विभिन्न स्रोत से आय की प्राप्ति होगी। संचित धन में आकस्मिक वृद्धि हो सकती है। पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

17 मई से 18 मई तक बुध कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में शत्रु पराजित होंगे तथा संचित धन की वृद्धि में सहायक सिद्ध होगे। ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।