बुध का कुम्भ राशि में संचार - मार्च 2021 - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
सूर्य का मीन राशि में संचार – 14 मार्च 2021
March 12, 2021
शुक्र का मीन राशि में गोचर 17-मार्च-2021
March 17, 2021

बुध का कुम्भ राशि में संचार – मार्च 2021

कालज्ञानम ग्रहाधीनम , ग्रहा: कर्मफलप्रदा:।सृष्टिरक्षणसंहारा: , सर्वे चापिग्रहनुगा:॥

उपर्युक्त श्लोक से स्पष्ट है कि जब सब कुछ ग्रहों के अधीन है तो हम ग्रह नक्षत्र का परिज्ञान करके अच्छे कार्य मे क्यूँ न संलग्न हो।ग्रहों मे सूर्य चंद्रमा को राजा तो बुध को युवराज की संज्ञा दी गयी है,बुध सम स्वभाव का ग्रह है और वह पापग्रहों के साथ होकर उनके अनुसार आचरण करता है ,साथ ही शुभ ग्रहों के साथ होकर शुभ फल की प्राप्ति कराता है।इसी क्रम को ध्यान मे रखकर बुध का कुम्भ राशि मे 11 मार्च  को प्रवेश हो रहा है, यह 11 मार्च 2021  से 01 अप्रैल 2021  तक “कुम्भ” राशि में रहेगा| उसका विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह बोध कराकर उन्हे हितकर मार्ग पर चलने के लिए उनका मार्ग प्रशस्त करें।आइये जानते है कि विभिन्न राशि वालों के लिए बुध का कुम्भ राशि मे पारगमन कैसा रहेगा | ||बुध का “कुम्भ” राशि में प्रवेश का गोचर से फल|| 

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-  मेष लग्न एवं राशि वाले जातक के लिए तृतीयेश एवं षष्ठेश  बुध की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप इस अवधि में पुरुषार्थ के द्वारा आय में वृद्धि होगी। यश की प्राप्ति होगी। मित्र, छोटे भाई बहन तथा परिवार के सदस्यों का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे। ननिहाल पक्ष तथा चाचा बुआ आदि का सुख प्राप्त होगा तथा इनके साथ संबंध मधुर रहेंगे। पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि के परिणामस्वरुप पराक्रम के द्वारा विद्या के क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी। विद्या के प्रभाव से तथा संतान के सहयोग से धन में वृद्धि होगी। शरीर स्वस्थ रहेगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में आकस्मिक धन लाभ हो सकता है या पहले से किसी को दिए हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी। रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में राजनीति के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।         वातजनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। इस अवधि में गलत संगति से बचकर रहें।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में शुभ कार्य में व्यय होगा। धार्मिक क्षेत्र में रुचि बढ़ेगी। भाग्य तथा संतान का पूर्ण सुख प्राप्त होगा।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष:- वृष राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए द्वितीयेश एवं पंचमेश बुध की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में नए पद की प्राप्ति हो सकती है। समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा। सरकारी क्षेत्र से धन की प्राप्ति होगी। वाणी एवं विद्या के प्रभाव से राज दरबार में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। संतान का सुख प्राप्त होगा। कुटुंब एवं बंधु बांधवों के साथ मधुर संबंध रहेंगे। संचित धन में वृद्धि होगी। शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में व्यवसाय में वृद्धि होगी। भूमि वाहन मकान आदि के क्रय में व्यय होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में सरकारी कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त होगा तथा कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। उदर विकार से कष्ट हो सकता है। माता को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में समाज में प्रतिष्ठित लोगों से तथा उच्च पदाधिकारियों से संबंध बनेंगे तथा इनके सहयोग से आय में वृद्धि होगी। पिता के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन:- मिथुन राशि एवं लग्न वाले जातको के लिए लग्नेश एवं चतुर्थेश बुध की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में भाग्य का सुख प्राप्त होगा। कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु विघ्न बाधाएं भी आएंगी। धार्मिक कार्य में विशेष रूचि नहीं रहेगी। धर्म की बात में बुराई ढूंढने में रुचि बढ़ेगी। तृतीय भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण मित्रों से वैचारिक मतभेद रहेगा। भाई-बहन तथा बंधु बाँधवो में वैमनस्यता रहेगी। भूमि वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। शरीर भी स्वस्थ रहेगा। मन में अशांति रहेगी।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में शत्रुता बढ़ेगी। नए शत्रु उत्पन्न होंगे, शत्रुओं के कारण धन हानि हो सकती है। वाद विवाद से बचकर रहने में ही भलाई है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। मन अशांत रहेगा तथा स्वभाव में उग्रता रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखने में ही भलाई है।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। यह समय अति उत्तम रहेगा। व्यवसाय में वृद्धि होगी। परंतु दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क:-  कर्क राशि एवं लग्न वालों के लिए तृतीयेश एवं व्ययेश बुध की गोचर बुध की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप निर्माणकारी कार्य में व्यय होगा। पुरुषार्थ के द्वारा संचित धन में वृद्धि होगी। कुटुंब का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। संतान सुख की प्राप्ति होगी। विद्या के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी। समाज में भी मान सम्मान प्राप्त होगा। धार्मिक यात्रा में व्यय हो सकता है। पराक्रम के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा । इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। विद्या के क्षेत्र में मनोवांछित लाभ होगा। संचित धन में वृद्धि होगी। राजकीय कोष से भी धन की प्राप्ति होगी। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखें।  वाणी में कठोरता के कारण पारिवारिक कलह हो सकता है। विद्या के प्रभाव से आय में वृद्धि होगी। शत्रु पर विजय प्राप्त होगी।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सख प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी । धार्मिक कार्य में विशेष रूचि रहेगी।

मा, मी, मू, मे मो, टा, टी, टू, टे

सिंह:- सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए धनेश एवं आयेश बुध की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में  व्यवसाय से आय एवं संचित धन में वृद्धि होगी। परंतु साझेदारी के व्यवसाय में आपसी मतभेद के कारण हानि हो सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। किसी न किसी कारण से मानसिक चिंता बनी रहेगी। जिसके कारण शरीर भी अस्वस्थ रहेगा। संचित धन एवं आय में वृद्धि होगी। परंतु बंधु बांधवों से विवाद हो सकता है। कार्यक्षेत्र में भी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पुरुषार्थ की कमी के कारण कार्यक्षेत्र में मनोवांछित सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। नौकरी के क्षेत्र में या सरकारी कार्य में भी मनोनुकूल सफलता प्राप्त नहीं होगी। भाई बहन एवं मित्रों से वैचारिक मतभेद रहेगा।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में उदर विकार या वातजनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा।पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ेगा।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में यात्रा हो सकती है। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। परंतु जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर नहीं रहेंगे। जीवनसाथी को स्वास्थ्य से संबंधित समस्या भी हो सकती है।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या:- कन्या राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश एवं दशमेश बुध की गोचर से छठवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। नौकरी या व्यवसाय में वृद्धि होगी। समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। यात्रा भी हो सकती है। निर्माणकारी या मांगलिक कार्य में व्यय होगा। शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पुरुषार्थ में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में मनोवांछित सफलता प्राप्त होगी। मित्र एवं छोटे भाई बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। पेट दर्द या व्रण आदि से के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। यश की प्राप्ति होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में उच्च पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। बुद्धि के प्रभाव से कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी। पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। भूमि वाहन मकान आदि का सुख प्राप्त होगा।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला:-  तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए भाग्येशएवं व्ययेश बुध की गोचर से  पंचम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में मनोवांछित सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त नहीं होगा। जिसके कारण कार्य में विलंब से सफलता मिलेगी। बाहरी स्थान से सहयोग प्राप्त होगा। आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहेगी। जिसके कारण आर्थिक क्षेत्र में परेशानी आ सकती है। संतान से भी वैचारिक मतभेद हो सकता है। कार्यक्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति ना होने के कारण मन अशांत रहेगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में बंधु बांधवो के साथ विवाद हो सकता है। संचित धन की हानि भी हो सकती है अर्थात कार्य संचालन के लिए संचित धन का सहारा लेना पड़ेगा। अन्य स्त्रियों से भी प्रेम संबंध बढ़ सकता है। जो असफल रहेगा तथा दांपत्य जीवन में कटुता ला सकता है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में संतान से विरोध का सामना करना पड़ेगा। संतान का सुख एवं सहयोग मनोनुकूल प्राप्त नहीं होगा। धार्मिक कार्य में विशेष रुचि नहीं रहेगी। विद्या के क्षेत्र में भी रूकावट आ सकती है।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धार्मिक कार्य या धार्मिक यात्रा में व्यय हो सकता है। पुरुषार्थ के अनुसार ही कार्य में सफलता प्राप्त होगी। विद्या के प्रभाव तथा पुरुषार्थ के द्वारा आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। आलस्य के कारण हानि हो सकती है।

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक:- वृश्चिक लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं आयेश बुध की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में माता का सुख प्राप्त होगा। पिता का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन एवं मकान उत्तम सुख प्राप्त होगा। उच्च पदाधिकारियों से मित्रता बढ़ेगी। समाज में प्रतिष्ठित लोगों से संबंध बनेंगे। आय में वृद्धि होगी। शरीर स्वस्थ रहेगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में भूमि, भूमि से संबंधित वस्तुओं से आय की प्राप्ति होगी। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे। विवाद में सफलता प्राप्त होगी।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। राजनीति के क्षेत्र में विशेष सफलता मिल सकती है। राजनीति से संबंधित लोगों से मित्रता हो सकती है।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में वाणी के प्रभाव से विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। आय एवं संचित धन में वृद्धि होगी। विद्या एवं संतान का सुख प्राप्त होगा। भद्र पुरुषों से संबंध बन सकते है। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु:- धनु लग्न एवं राशि वालों के लिए सप्तमेश एवं दशमेश बुध की गोचर  से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में पुरुषार्थ की कमी के कारण कार्य में सफलता प्राप्त नहीं होगी। साहस में कमी आ सकती है। छोटे भाई बहन से वैचारिक मतभेद रहेगा। बंधु बंधुओं से विवाद हो सकता है। कर्म के अनुसार या परिश्रम के अनुसार ही कार्य में सफलता प्राप्त होगी। ससुराल पक्ष के हस्तक्षेप के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। कार्य की सफलता में मित्र एवं संतान का सहयोग प्राप्त होगा तथा पराक्रम में वृद्धि होगी।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में धर्म में रुचि नहीं रहेगी। मन की चंचलता के कारण कार्य में हानि हो सकती है। वात जनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा। भाग्य का सुख प्राप्त होगा। कार्य में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। माता एवं भूमि वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर:-  मकर लग्न एवं राशि वालों के लिए षष्ठेश एवं नवमेश बुध की गोचर से  द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी। वाणी में मधुरता रहेगी। जिसके प्रभाव से कुटुंब में प्रेम व्यवहार रहेगा। नए वस्त्र एवं आभूषण की प्राप्ति होगी। धार्मिक कार्य में से भी धन की प्राप्ति होगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिसके प्रभाव से प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। वाणी के प्रभाव से भी संचित धन में वृद्धि होगी। समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में भूमि एवं भूमि से संबंधित व्यवसाय से आय में वृद्धि होगी। प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखें। वाणी दोष के कारण कुटुंब में कलह हो सकता है। संचित धन में भी हानि हो सकती है। मन चंचल रहेगा। जिसके कारण कार्य में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं होगी।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मांगलिक एवं धार्मिक कार्य में व्यय होगा। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

कुंभ:-  कुंभ लग्न एवं राशि वालों के लिए पंचमेश एवं अष्टमेश बुध की गोचर से प्रथम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। परंतु वाणी दोष के कारण अर्थात अप्रिय शब्दों के प्रयोग के कारण आँतोत्गतवा मानहानि हो सकती है। इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखते हुए कम शब्द या मधुर शब्द का प्रयोग करने में ही भलाई है। दांपत्य जीवन में भी कटुता आ सकती है।  आंत से संबंधित रोग से जीवनसाथी को कष्ट सकता है।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में भूमि मकान आदि से लाभ होगा परंतु भूमि से संबंधित विवाद से बचें, इसके कारण धन हानि भी हो सकती है। भाग्य का सुख प्राप्त होगा। परंतु अति आत्मविश्वास के कारण या अहंकार के कारण हानि हो सकती है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में चिंता के कारण संताप हो सकता है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आय एवं धन के दृष्टिकोण से अर्थात आर्थिक दृष्टिकोण से समय अति उत्तम है। परंतु स्वास्थ्य के लिए समय अनुकूल नहीं रहेगा। रोग व्याधि में व्यय हो सकता है।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन:-  मीन लग्न एवं राशि वालों के लिए चतुर्थेश एवं सप्तमेश बुध की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। व्यवसाय में हानि हो सकती है। शत्रुओं के कारण अर्थात लड़ाई झगड़े के कारण अपव्यय हो सकता है। विवाद से बचकर रहें। विद्या के क्षेत्र में मनोवांछित सफलता प्राप्त नहीं होगी। संतान से भी वैचारिक मतभेद हो सकता है। निर्माणकारी कार्य या मांगलिक कार्य में व्यय करना हितकर रहेगा।

11 मार्च से 16 मार्च तक बुध धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में  बंधु बांधवों से मनमुटाव हो सकता है। संचित धन में हानि होगी। बाहरी स्थान से आकस्मिक लाभ भी हो सकता है। व्यवसाय से संबंधित या कार्य से संबंधित यात्रा भी हो सकती है।

16 मार्च से 25 मार्च तक बुध शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में दांपत्य जीवन के लिए समय अनुकूल नहीं है। सुख में हानि हो सकती है। शत्रुओं द्वारा अपमान भी हो सकता है।

25 मार्च से 1 अप्रैल तक बुध पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त हो सकती है। निर्माणकारी कार्य में व्यय होगा। धार्मिक एवं मांगलिक कार्य भी परिवार में हो सकता है।

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