मंगल का वृष राशि में गोचर 22-मार्च-2019

 ” सनमंगलम मंगल:”

सूर्य को ग्रहों का राजा तो मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गई है हमारे ज्योतिष शास्त्र में,मंगल के सूर्य,चन्द्र,और गुरु मित्र तो शुक्र,शनि समता का भाव लिए हुए साथ हीं बुध शत्रुवत भाव से मंगल का साथ देते हैं।इन ग्रहों की किस भाव में उपस्थिति कैसे प्रभावित कर रही है आपकी राशि को यह कन्या राशिस्थ मंगल के आधार पर विवेचित किया जाएगा।।मंगल शुभ स्थितियों में शुभ तो विषम स्थितियों में रक्त,उच्चरक्तचाप,चर्मरोग,कुष्ठ रोग,हड्डी संबंधी रोग और पित्त ज्वर आदि विकार देते हैं।

मंगल का वृष राशि में संचार जो कि 22 मार्च 2019 को हो रहा है और यह 7 मई 2019 तक रहेगा | आइए जानते हैं की यह गोचर सभी बारह राशियों को किस प्रकार से प्रभावित करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश एवं अष्टमेश मंगल की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में वाणी में कठोरता के कारण कुटुंब में विवाद हो सकता है। दुष्ट लोगों की संगति के कारण संचित धन की हानि हो सकती है। मन में अकारण भय बना रहेगा। रक्त विकार के कारण या रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। कठिन परिश्रम के होते हुए भी कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। 

22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। परंतु वाणी पर नियंत्रण रखना अति आवश्यक है। वाणी की कठोरता से बने हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। संतान का सहयोग प्राप्त होगा। वाणी में कठोरता के कारण धन हानि हो सकती है।
 

6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है । इस अवधि में मानसिक असंतोष रहेगा। नेत्र से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। बुरे कर्म या पाप कर्म की प्रवृत्ति में वृद्धि हो सकती है। माता को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है।
 

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा। संचित धन में वृद्धि हो सकती है। परंतु आकस्मिक धन हानि भी होगी। चोरी आदि का भय रहेगा।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- व्ययेश एवं सप्तमेश मंगल की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में मन आंतरिक रुप से शोकाकुल तथा चिंता युक्त रहेगा। कुटुंम्बियो से वियोग हो सकता है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रक्त से संबंधित रोग ज्वर एवं उष्णता पैदा करने वाले रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। यात्रा में भी अपव्यय हो सकता है। यात्रा में शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवन साथी का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा। स्त्री को भी ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में स्वजनों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। नेत्र ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। परिवार से दूर जाना पड़ सकता है। प्रत्येक कार्य में विलंब से सफलता प्राप्त होगी। 
 
6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मित्रों एवं छोटे भाई बहन से वैचारिक मतभेद के कारण मानसिक चिंता हो सकती है। मनोबल एवं पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहेगी। चोट आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि तथा वाहन आदि में निवेश करने से हानि हो सकती है।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- आयेश एवं षष्ठेश मंगल की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। शत्रुओं में वृद्धि होगी। विवाद के कारण अपव्यय हो सकता है। नेत्र रोग से कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। संतान से वैचारिक मतभेद हो सकता है। दांपत्य जीवन में व्यय की अधिकता या आय में कमी के कारण कटुता आ सकती है। मित्र एवं संबंधियों से विरोध का सामना करना पड़ेगा।

22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। स्वभाव में क्रोध की अधिकता रहेगी जिसके कारण आय में हानि हो सकती है तथा बने हुए कार्य भी बिगड़ सकते हैं।

6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मानसिक चिंता में वृद्धि होगी। जातक बिना सोचे समझे कार्य करेगा। जिसके कारण धन एवं मान की हानि हो सकती है। संतान का सहयोग प्राप्त नहीं होगा। कुटुंब में विवाद के कारण मन में शोक्षभ रहेगा।

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में बाहरी स्थान के सहयोग से या बाहरी स्थानों से आय में वृद्धि हो सकती है। जीवनसाथी को पेट के रोग, ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- दशमेश एवं पंचमेश मंगल की गोचर से आय स्थान में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में विभिन्न स्रोत से आय की प्राप्ति होगी। जमीन जायदाद से भी लाभ होगा। भूमि व मकान आदि का सुख प्राप्त होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा। प्रशासनिक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख प्राप्त होगा। विद्या के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होगी। भाइयों एवं मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा तथा प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में आय में आशा से अधिक वृद्धि होगी। कुटुंब का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। मन में उत्साह रहेगा।
 
6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मन प्रसन्न रहेगा तथा आरोग्यता की प्राप्ति होगी। मनोबल एवं परिश्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। स्त्री वर्ग का भी सहयोग प्राप्त होगा। तरल पदार्थ के व्यवसाय से भी आय में वृद्धि हो सकती है।

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में नौकरी में तथा प्रशासनिक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। पिता के द्वारा या पिता के व्यवसाय से भी आय में वृद्धि होगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए नवमेश एवं चतुर्थेश मंगल की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में दुश्चेटा अर्थात ऐसा कार्य जो नहीं करना चाहिए या क्षमता से अधिक कार्य करने के कारण कार्य में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। क्षमता के अनुकूल कार्य करने से सफलता प्राप्त होगी। विद्या के क्षेत्र में हानि हो सकती है। संतान से मतभेद हो सकता है या संतान को शारीरिक कष्ट हो सकता है। किसी कार्य वश या सरकारी कार्य हेतु घर से दूर रहना पड़ सकता है। परिश्रम के अनुसार ही कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा तथा संचित धन में वृद्धि होगी। उच्च पदाधिकारियों के सहयोग से नौकरी के क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी। इन से विवाद के कारण कार्य में हानि हो सकती है। अतः इस अवधि में विवाद से बच कर रहें।
 
6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र मे रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में व्यय की अधिकता के कारण धन हानि हो सकती है। गलत निर्णय के कारण कार्य में हानि होगी। अतः इस अवधि में सोच समझकर कार्य का निर्णय लेने में ही भलाई है।
 
27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र मे रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। कार्यक्षेत्र में परिश्रम के अनुसार सफलता प्राप्त होगी।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- कन्या राशि और लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं तृतीयेश मंगल की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शरीर में निर्बलता रहेगी। समाज में मान सम्मान की हानि होगी। धातु क्षय आदि के कारण शरीर में शक्ति की कमी रहेगी। जिसके कारण चलने फिरने में भी कठिनाई होगी ।भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त नहीं होगा। जिसके कारण कार्य में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। रोजगार में हानि हो सकती है। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे।


22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में रक्त अल्पता के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। नेत्र विकार से भी कष्ट हो सकता है। व्यय की अधिकता रहेगी। सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के कारण भी कार्य में हानि हो सकती है।
 
6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मन अशांत रहेगा। धर्म के विरुद्ध आचरण करेगा। आय में अवरोध रहेगा। राज्य की ओर से भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल  मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में हड्डी एवं मज्जा से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्रों का सुख एवं सहयोग प्राप्त नहीं होगा। भूमि से संबंधित विवाद हो सकता है।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- तुला लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए सप्तमेश एवं द्वितीयेश मंगल की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में ज्वर चोट या घाव आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य सुख में कमी रहेगी। पराक्रम की हानि होगी। बड़े भाई को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। आकस्मिक धन हानि हो सकती है। परिवार से दूर रहना पड़ सकता है। व्यवसाय से धन की वृद्धि हो सकती है परंतु आकस्मिक धन हानि के कारण अंततोगत्वा संचित धन में भी हानि हो सकती है।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में आय में वृद्धि हो सकती है परंतु बड़े भाई या पिता को शारीरिक कष्ट भी हो सकता है। नेत्र रोग या गुदा रोग से भी शारीरिक कष्ट हो सकता है।  

6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। सुख में कमी रहेगी। कुटुंब में विवाद के कारण मन अशांत रहेगा।

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी परंतु स्त्री को शारीरिक कष्ट हो सकता है। वाहन आदि चलाने में सावधानी रखें। आकस्मिक दुर्घटना के कारण चोट आदि का भय है। भाइयों से वैचारिक मतभेद रहेगा।

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए षष्ठेश एवं लग्नेश मंगल की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में अपनी स्त्री से कलह रहेगा अर्थात दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा। स्त्री को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। नेत्र रोग एवं उदर रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। स्त्री वर्ग के सहयोग से कार्यक्षेत्र या नौकरी में सफलता की प्राप्ति हो सकती है परंतु उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण कार्य में हानि भी हो सकती है। अतः विवाद से बचकर रहें। प्रतिस्पर्धा के कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में ससुराल पक्ष के हस्तक्षेप के कारण दांपत्य जीवन में कलह हो सकता है। ज्वर आदि से शरीरिक कष्ट हो सकता है। कष्टकारी यात्रा करनी पड़ सकती है। मान हानि हो सकती है जिसके कारण मन में कलेश रहेगा।  

6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। व्यवसाय में लाभ होगा। परंतु स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। मन अशांत रहेगा।

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। शत्रुओं के बढ़ते प्रभाव के कारण मन अशांत रहेगा। व्यवसाय के माध्यम से संचित धन में वृद्धि होगी। परंतु कुटुम्ब से विरोध या विवाद के कारण मन अशांत रहेगा। पेट रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- धनु लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए पंचमेश एवं व्ययेश मंगल की गोचर से छठवे भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में शत्रुओं से कलह की निवृत्ति होगी अर्थात उन पर विजय प्राप्त होगी। उनसे समझौता हो सकता है। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। रोग से छुटकारा मिलेगा। संचित धन में वृद्धि होगी। समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा तथा व्यक्ति का प्रभाव में वृद्धि होगी। बाहरीक स्थान से भी सहयोग प्राप्त होगा।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा।  प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। नौकरी या सरकारी कार्य में भी सफलता प्राप्त होगी। पिता का सहयोग प्राप्त होगा।

6 अप्रैल से 27 अप्रैल
तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा।  इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में यश एवं आनंद की प्राप्ति होगी। मन प्रसन्न रहेगा तथा शरीर स्वस्थ रहेगा। रोगों का नाश होगा। संचित धन में आकस्मिक वृद्धि हो सकती है।
 
27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- मकर लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए चतुर्थेश एवं आयेश मंगल की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में आय में वृद्धि होगी परंतु ज्वर आदि के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है। संतान को शारीरिक या मानसिक कष्ट हो सकता है। संतान से वैचारिक मतभेद भी हो सकता है। स्वजनों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। कुटुंब में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। बिना कारण चिंता बनी रहेगी। शत्रुओं से भी कष्ट होगा।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में मानसिक भ्रम उत्पन्न होगा एवं रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।

6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में पेट में वात एवं कफ से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। आय में वृद्धि होगी। परंतु दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है। विचार करने की शक्ति अर्थात निर्णायक क्षमता में कमी आ सकती है।
 
27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र  में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में भूमि वाहन एवं मकान आदि का सुख प्राप्त होगा परंतु पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। नौकरी में उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण हानि हो सकती है। कार्यक्षेत्र में सरकारी कर्मचारियों से विरोध का सामना करना पड़ेगा।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-कुम्भ लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए तृतीयेश एवं दशमेश मंगल की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में पेट की बीमारी से शारीरिक कष्ट हो सकता है। बंधुओं एवं मित्रों के कारण दुख या मानसिक कष्ट हो सकता है। स्थान परिवर्तन भी हो सकता है। भौतिक सुख में कमी आएगी। जनता अर्थात सर्वसाधारण से विरोध का सामना करना पड़ेगा। भूमि एवं मकान से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में पारिवारिक कलह के कारण मन अशांत रहेगा तथा सुख की कमी का आभास होगा। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य सुख में भी कमी आ सकती है।

  6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र मे रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा ह।  इस अवधि में मन चंचल रहेगा वक्ष स्थल में रोग से कष्ट हो सकता है। माता को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। स्वजनों से विरोध के कारण सुख में हानि हो सकती है।

27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। सरकारी क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त होगा। परंतु मित्रों से वैचारिक मतभेद रहेगा।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन-  मीन लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए दितीयेश एवं नवमेश मंगल की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी तथा प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिसके प्रभाव से कम परिश्रम सही कार्य में सिद्धि प्राप्त होगी। कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा तथा संचित धन में वृद्धि होगी। नौकरी में सफलता प्राप्त होगी तथा सरकारी कार्य में कर्मचारियों का सहयोग प्राप्त होगा।
 
22 मार्च से 6 अप्रैल तक मंगल कृतिका नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। इस अवधि में सज्जनों तथा उच्च पदाधिकारियों के से संबंध बनेंगे तथा कार्य की सफलता में इनका सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा तथा रोगों से मुक्ति मिलेगी।
 
6 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मंगल रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। मन प्रसन्न रहेगा। भाग्य में वृद्धि होगी ।
 
27 अप्रैल से 7 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में जिस कार्य को प्रारंभ करेंगे कठिन से कठिन कार्य में भी सफलता की प्राप्ति होगी।