मंगल का मिथुन राशि में गोचर 07-मई-2019



 ” सनमंगलम मंगल:”

सूर्य को ग्रहों का राजा तो मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गई है हमारे ज्योतिष शास्त्र में,मंगल के सूर्य,चन्द्र,और गुरु मित्र तो शुक्र,शनि समता का भाव लिए हुए साथ हीं बुध शत्रुवत भाव से मंगल का साथ देते हैं।इन ग्रहों की किस भाव में उपस्थिति कैसे प्रभावित कर रही है आपकी राशि को यह कन्या राशिस्थ मंगल के आधार पर विवेचित किया जाएगा।।मंगल शुभ स्थितियों में शुभ तो विषम स्थितियों में रक्त,उच्चरक्तचाप,चर्मरोग,कुष्ठ रोग,हड्डी संबंधी रोग और पित्त ज्वर आदि विकार देते हैं। मंगल का मिथुन राशि में संचार जो कि 7 मई  2019 को हो रहा है और यह 22 जून 2019 तक रहेगा | आइए जानते हैं की यह गोचर सभी बारह राशियों को किस प्रकार से प्रभावित करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश एवं अष्टमेश मंगल की गोचर से तीसरे भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। धन की वृद्धि होगी  शरीर स्वस्थ रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता की प्राप्ति से मन प्रसन्न रहेगा। यश की प्राप्ति होगी  उच्च पदाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। 

7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में आयु में वृद्धि होगी अर्थात स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। भाई बंधुओं से संबंध मधुर रहेंगे। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में भाग्य का उत्तम सुख प्राप्त होगा। कार्य में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी।शत्रु में मित्रवत व्यवहार करेंगे तथा कार्य के सिद्धि में सहायक सिद्ध होंगे।
 7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धार्मिक कार्य में रुचि बढ़ेगी। परिवार में धार्मिक एवं मांगलिक कार्य होंगे। नौकरी के क्षेत्र में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। तीर्थ यात्रा हो सकती है।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- व्ययेश एवं सप्तमेश मंगल की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में धन की हानि होगी। वाणी में कठोरता के कारण विवाद हो सकता है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रक्त एवं मज्जा से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य जीवन में कटुता रहेगी अर्थात दांपत्य जीवन में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में यात्रा में धन का व्यय होगा। बाहरी स्थान के व्यवसाय से मनोनुकूल धन की प्राप्ति नहीं होगी। कुटुंब में विवाद हो सकता है।  
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। विद्या के क्षेत्र में हानि हो सकती है। नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। आय एवं धन के दृष्टिकोण से समय अनुकूल है परंतु स्वास्थ्य के लिए समय अनुकूल नहीं है। रक्त एवं वात से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- आयेश एवं षष्ठेश मंगल की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में मन भीतर ही भीतर किसी कारण से शोकाकुल या चिंतायुक्त रहेगा। अपने कुटुंब से भी वियोग हो सकता है। रक्त संबंधित रोग ज्वर या अन्य उष्ठता पैदा करने वाले रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। कार्य में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। 
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में वृण या चोट आदि से कष्ट हो सकता है। शत्रुओं के बढ़ते प्रभाव के कारण मन अशांत रहेगा। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। नौकरी के क्षेत्र में रुकावट आ सकती है।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कष्टकर है। मन अशांत रहेगा। परंतु राजनीति से संबंधित लोगों के सहयोग से कार्य में सफलता की प्राप्ति हो सकती है।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र मे रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मान सम्मान की हानि हो सकती है। गुरुजनों एवं उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण प्रगति में रुकावट आ सकती है। दांपत्य जीवन में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा।  

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- दशमेश एवं पंचमेश मंगल की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में व्यय की अधिकता रहेगी। नौकरी के क्षेत्र में स्थानांतरण भी हो सकता है। उष्णता या ताप से संबंधित विविध प्रकार के रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन अस्थिर रहेगा कार्य में मनोनुकूल सफलता ना मिलने के कारण मन चिंता से ग्रस्त रहेगा। मानहानि या आर्थिक दंड भी लग सकता है।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में हानि हो सकती है। संतान एवं जीवन साथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मित्रों एवं छोटे भाई बहन से मतभेद रहेगा।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। शत्रुओं के कारण अपव्यय हो सकता है। मुकदमा विवाद आदि में व्यय होगा। इस अवधि में विवाद से बच कर रहें। 
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धार्मिक यात्रा हो सकती है। निर्माणकारी कार्य या धार्मिक कार्य में व्यय होगा। कठिन परिश्रम से कार्य में सफलता प्राप्त होगी।  

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए नवमेश एवं चतुर्थेश मंगल की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में जय आरोग्य जमीन जायदाद से लाभ की प्राप्ति होगी। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन आदि का उत्तम सुख प्राप्त होगा। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। जिससे कम परिश्रम से ही कार्य में सफलता प्राप्त होगी। मकान भूमि आदि से धन की प्राप्ति होगी। विभिन्न स्रोत से आय में वृद्धि होगी।
7 मई से 17 मई तक मंगल मगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भाई बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। माता का सुख एवं सहयोग मिलेगा। आय में आशा से अधिक वृद्धि होगी। 
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा तथा सभी प्रकार के कष्ट दूर होंगे।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। नौकरी के क्षेत्र में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा। विद्या एवं संतान के सहयोग से आय में वृद्धि होगी।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- कन्या राशि और लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं तृतीयेश मंगल की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में कार्य में असफलता या विघ्न बाधाएं उत्पन्न होगी। ऐसा कार्य जो नहीं करना चाहिए या कार्य किया जाए उसमें दुष्टचेस्टा के कारण हानि होगी। तामसिक प्रवृत्ति की वृद्धि होगी। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। प्रशासनिक क्षेत्र में हानि हो सकती है। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी तथा धन की प्राप्ति होगी। मित्रों के कारण कार्य में हानि हो सकती है।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में चोट आदि के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है । पिता के व्यवसाय में हानि हो सकती है। कार्य में सिद्धि विलंब से प्राप्त होगी।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में दांपत्य जीवन में कलह उत्पन्न हो सकता है। वाहन आदि के सुख में कमी का योग है। उच्च पदाधिकारियों से विवाद के कारण कार्य में हानि हो सकती है।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- तुला लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए सप्तमेश एवं द्वितीयेश मंगल की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में व्यवसाय के द्वारा आय की प्राप्ति होगी। परंतु आय की अपेक्षा व्यय की अधिकता रहेगी। विवाद के कारण संचित धन की हानि हो सकती है। रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। जातक धर्म के विरुद्ध आचरण करेगा। कार्य क्षेत्र में बाधा उत्पन्न होगी।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी। परंतु कुटुंब से विवाद हो सकता है। भाइयों को कष्ट हो सकता है।

17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में विवाद के कारण अपव्यय हो सकता है। सूखा रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। शरीर में निर्बलता रहेगी। पुरुषार्थ की कमी के कारण मनोनुकूल सफलता प्राप्त नहीं होगी।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मित्रों का सहयोग प्राप्त नहीं होगा। साझेदारी के कार्य में हानि हो सकती है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। जिसके कारण मन अशांत रहेगा।

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक- वृश्चिक लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए षष्ठेश एवं लग्नेश मंगल की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में चोट आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मान-सम्मान में भी हानि हो सकती है। पराक्रम की हानि हो सकती है। परिश्रम के अनुसार कार्य में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। कुटुंब में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। वाणी में कठोरता के कारण परिवार में विवाद हो सकता है। मित्रों के साथ वैचारिक मतभेद रहेगा। जिसके कारण मन अशांत रहेगा।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में वर्ण एवं चोट से शारीरिक कष्ट हो सकता है। नेत्र विकार से भी कष्ट हो सकता है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे जिसके कारण मन अशांत रहेगा।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में गुदा रोग से बवासीर आदि से कष्ट हो सकता है। बुरे कर्मों में प्रकृति अधिक रहेगी। दुरव्यसन के कारण संचित धन में हानि हो सकती है। कुटुंब के साथ अनबन रहेगी।

7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में संतान एवं विद्या के प्रभाव से संचित धन में वृद्धि होगी। शेयर बाजार में निवेश करने से हानि होगी। इस अवधि में शेयर बाजार में निवेश ना करें। मांगलिक एवं धार्मिक कार्य में व्यय होगा।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- धनु लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए पंचमेश एवं व्ययेश मंगल की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में नेत्र रोग एवं उदर रोग से कष्ट हो सकता है। स्वजनों के व्यवहार से जातक को मानसिक एवं शारीरिक कष्ट हो सकता है। दांपत्य जीवन में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा। जीवनसाथी को भी रक्त एवं हड्डी से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट होगा। विद्या के क्षेत्र में भी मनोनुकूल सफलता प्राप्त नहीं होगी। संतान से वैचारिक मतभेद रहेगा।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में यात्रा हो सकती है। यात्रा सुखद नहीं रहेगी। व्यय की अधिकता रहेगी। छोटे भाई बहन को शारीरिक कष्ट हो सकता है।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में रोजगार में हानि होगी। वाणी दोष के कारण बने हुए काम भी बिगड़ सकते हैं। अतः इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखें। वायु विकार के कारण शारीरिक कष्ट हो सकता है।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। पिता को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। पिता के व्यवसाय में हानि हो सकती है। नौकरी के क्षेत्र में भी हानि हो सकती है। धार्मिक यात्रा या धार्मिक कार्य में व्यय होगा।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- मकर लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए चतुर्थेश एवं आयेश मंगल की गोचर से छठे भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में शत्रुओं से कलह कि निवृत्ति होगी अर्थात शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगा या उनसे समझौता होगा। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। भूमि वाहन तथा मकान आदि का सुख प्राप्त होगा। जमीन जायदाद में वृद्धि होगी। भूमि से संबंधित रोजगार से लाभ मिलेगा। बाहरी स्थानों से भी संबंध बनेंगे।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पराक्रम में वृद्धि होगी। प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। वैयक्तिक प्रभाव में भी वृद्धि होगी। कम परिश्रम में ही कार्य सिद्धि प्राप्त होगी।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे तथा कार्य की सिद्धि में सहायक बनेंगे। पेट रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है।
  7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में बाहरी स्थान से सहयोग प्राप्त होगा। समाज में मान सम्मान बढ़ेगा। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। आयात निर्यात के व्यवसाय से लाभ होगा।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-कुम्भ लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए तृतीयेश एवं दशमेश मंगल की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में बिना कारण चिंता बनी रहेगी। संतान को कष्ट हो सकता है। विद्या के क्षेत्र में भी मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। मित्र एवं भाई बंधुओं से कलह रहेगा। व्यय की अधिकता रहेगी। ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। पराक्रम की हानि हो सकती है।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। यह समय संतान के लिए अनुकूल नहीं है। संतान की प्रगति में रुकावट आ सकती है। संतान को शारीरिक कष्ट भी हो सकता है। आय के दृष्टिकोण से समय अनुकूल रहेगा।

17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में रुकावट आएगी। व्यय की अधिकता रहेगी।मानहानि भी हो सकती है। सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी आ सकती है।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। कुटुंब से विवाद हो सकता है। जिसके कारण मन अशांत रहेगा। आय एवं धन के दृष्टिकोण से समय अनुकूल है।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन-  मीन लग्न एवं राशि वाले जातकों के लिए द्वितीयेश एवं नवमेश मंगल की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में स्थान अर्थात जिस स्थान पर जातक रह रहा है वह छूट जाए या नौकरी आदि में स्थान परिवर्तन हो। भाई बंधुओं के कारण दुख होगा। सुख में कमी का आभास होगा। माता को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि से संबंधित समस्या उत्पन्न हो सकती है।
7 मई से 17 मई तक मंगल मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। धन के दृष्टिकोण से समय अनुकूल है परंतु स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रक्त से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। मान सम्मान में कमी आएगी।
17 मई से 7 जून तक मंगल आद्रा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में वक्ष स्थल में रोग से कष्ट हो सकता है। मन भयभीत रहेगा तथा हिंसा एवं क्रूरता की प्रवृत्ति जागृत होगी। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा।
7 जून से 22 जून तक मंगल पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु सर्वसाधारण से विरोध का सामना करना पड़ेगा।