मंगल का कुंभ राशि में गोचर 04-मई-2020 – Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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मंगल का कुंभ राशि में गोचर 04-मई-2020

 

 ” सनमंगलम मंगल:”

सूर्य को ग्रहों का राजा तो मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गई है हमारे ज्योतिष शास्त्र में,मंगल के सूर्य,चन्द्र,और गुरु मित्र तो शुक्र,शनि समता का भाव लिए हुए साथ हीं बुध शत्रुवत भाव से मंगल का साथ देते हैं।इन ग्रहों की किस भाव में उपस्थिति कैसे प्रभावित कर रही है आपकी राशि को यह कुंभ राशिस्थ मंगल के आधार पर विवेचित किया जाएगा।।मंगल शुभ स्थितियों में शुभ तो विषम स्थितियों में रक्त,उच्चरक्तचाप,चर्मरोग,कुष्ठ रोग,हड्डी संबंधी रोग और पित्त ज्वर आदि विकार देते हैं। मंगल का कुंभ राशि में संचार जो कि 4 मई  2020 को हो रहा है और यह 18 जून 2020 तक रहेगा | आइए जानते हैं की यह गोचर सभी बारह राशियों को किस प्रकार से प्रभावित करेगा-

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष- मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए लग्नेश एवं अष्टमेश मंगल की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में आय में मनोनुकूल वृद्धि होगी। बड़े भाई का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। भूमि एवं मकान आदि का पूर्ण सुख प्राप्त होगा अर्थात जमीन एवं जायदाद में वृद्धि होगी। कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति होगी। शरीर स्वस्थ रहेगा। द्वितीय भाव पर चौथी दृष्टि से कुटुंब का सहयोग एवं सुख प्राप्त होगा। संचित धन में वृद्धि होगी। वाणी के प्रभाव से आय में वृद्धि होगी। पंचम स्थान पर सातवी पूर्ण दृष्टि के फलस्वरूप विद्या के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। संतान की प्रगति के लिए समय अति उत्तम है। विद्या एवं संतान के सहयोग से आय में वृद्धि होगी।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होगी। बिगड़े हुए काम इस अवधि में बनेंगे। प्रशासनिक क्षेत्र में पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा।

14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। शत्रु मित्रवत व्यवहार करेंगे तथा कार्य की सफलता में सहायक सिद्ध होंगे।

3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। धार्मिक कार्य में रुचि उत्पन्न होगी।
 

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष- वृष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए व्ययेश एवं सप्तमेश मंगल की गोचर से दशम में उपस्थिति के परिणामस्वरुप इस अवधि में कार्यक्षेत्र में आशानुकूल  सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। सामर्थ से अधिक कार्य करने के कारण कार्य में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी अर्थात समर्थ के अनुकूल कार्य न करने से कार्य में हानि हो सकती है। स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। यात्रा हो सकती है या किसी कार्य हेतु स्थान से दूर जाना पड़ सकता है। व्यय की अधिकता रहेगी। आकस्मिक धन हानि हो सकती है। लग्न पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण शरीर अस्वस्थ रहेगा। रक्त एवं हड्डी से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। चतुर्थ भाव पर सातवी पूर्ण दृष्टि के कारण भूमि मकान में निवेश करने से हानि हो सकती है। माता का स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। पंचम भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण विद्या के क्षेत्र में रुकावट एवं संतान से मतभेद हो सकता है।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में व्यवसाय एवं बाहरी स्थान से धन लाभ हो सकता है। परंतु दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा।

14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में चोरों का भय रहेगा। सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त नहीं होगी। अपव्यय होगा।

3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। आकस्मिक घटना हो सकती है। वाहन आदि चलाने में सावधानी रखें।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- मिथुन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए आयेश एवं षष्ठेश मंगल की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरुप रोजगार एवं कार्यक्षेत्र में हानि तथा बाधा उत्पन्न होगी। धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा।स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। रक्त की कमी के कारण रोग उत्पन्न हो सकते हैं। बड़ों के अनादर से धन हानि एवं मान हानि हो सकती है। इस अवधि में बड़ों का मान सम्मान करने से आय में वृद्धि हो सकती है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। पराजय का सामना करना पड़ेगा। धातु क्षय के कारण शरीर और अशक्त एवं निर्बल रहेगा। वैभव पूर्ण दृष्टि के कारण व्यय की अधिकता रहेगी। रोग व्याधि एवं मुकदमा आदि के कारण अपव्यय होगा। तीसरे भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण भाई बंधुओं से विरोध का सामना करना पड़ेगा। साझेदारी के व्यवसाय में हानि हो सकती है। मित्रों से वैचारिक मतभेद हो सकता है। पराक्रम के द्वारा ही कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। चतुर्थ भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। मकान आदि में निवेश करने से हानि होगी।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में पराक्रम के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परिश्रम के अनुसार ही कार्य में सिद्धि मिलेगी।

14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। जिसके कारण जातक धर्म के विरुद्ध आचरण करेगा तथा भाग्य का सुख प्राप्त नहीं होगा।
3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मान सम्मान में हानि हो सकती है । उच्च पदाधिकारी तथा समाज के सम्मानित व्यक्तियों से विवाद के कारण हानि होगी।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- कर्क राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए दशमेश एवं पंचमेश मंगल की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप एवं चोट या घाव से शारीरिक कष्ट हो सकता है। इस अवधि में वाहन आदि सावधानी से चलाएं आकस्मिक घटना घट सकती है। संचित धन की हानि हो सकती है। वाणी में कठोरता के कारण कुटुंब से विवाद हो सकता है। कार्यक्षेत्र में हानि हो सकती है। गुदा रोग एवं नेत्र रोग से भी कष्ट हो सकता है। आय स्थान पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण आय में वृद्धि के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। बड़े भाई से मतभेद हो सकता है। विद्या के प्रभाव से आय में वृद्धि होगी। द्वितीय भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण के कारण संचित धन मे संतान के सहयोग एवं विद्या के द्वारा वृद्धि का योग है परंतु शेयर बाजार में निवेश करने से हानि होगी। तीसरे भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण मित्रों एवं भाई बंधुओं से मतभेद रहेगा। पुरुषार्थ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। जिसके कारण रक्त एवं हड्डी से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। जुआ आदि के व्यसन से दूर रहें, हानि हो सकती है।

14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। जिसके कारण चोट आदि से कष्ट हो सकता है। अनैतिक कार्य में रुचि बढ़ेगी।

3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है।  इस अवधि में धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा। कार्य में मनोनुकूल सफलता प्राप्त नहीं होगी। शत्रु प्रभावहीन रहेंगे। विद्या में हानि या अवरोध उत्पन्न होगा।

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- सिंह राशि एवं लग्न वाले जातकों भाग्येेश एवं चतुर्थेश मंगल की गोचर से सप्तम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में सरकारी कार्य में सफलता प्राप्त होगी। परंतु दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा। भूमि एवं मकान से संबंधित समस्याओं के कारण कुटुंब में विवाद रहेगा। जिससे मन अशांत रहेगा। नेत्र एवं उदर रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मनोनुकूल व्यंजन की प्राप्ति नहीं होगी। दशम भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। लग्न पर सातवी पूर्ण दृष्टि के कारण मन में अशांति रहेगी। सिर दर्द एवं ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। द्वितीय भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण धन हानि हो सकती है। कुटुंब से वैचारिक मतभेद हो सकता है।

 4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा।इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में सुख में वृद्धि होगी। भूमि एवं मकान आदि में निवेश करने से लाभ होगा। परिश्रम के अनुसार सफलता प्राप्त होगी।
 14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में वायु जनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अशांति रहेगी।
 3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में विद्या एवं संतान का सुख प्राप्त होगा। परंतु स्त्री को शारीरिक कष्ट हो सकता है। अति आत्मविश्वास के कारण व्यवसाय एवं कार्य क्षेत्र में हानि हो सकती है।

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या- कन्या राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं तृतीय मंगल की गोचर छठवें भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी अथवा शत्रुओं से संधि होगी। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। मन प्रसन्न रहेगा। कार्य में तथा रोजगार आदि में मनोनुकूल सफलता की प्राप्ति होगी। पराक्रम में वृद्धि होगी। मित्र तथा छोटे भाई बहन का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। भाग्य भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी प्रशासनिक क्षेत्र में आकस्मिक सफलता की प्राप्ति होगी। बारहवें भाव पर सातवी पूर्ण दृष्टि के फलस्वरूप निर्माणकारी कार्य में व्यय होगा। भूमि एवं भूमि से संबंधित वस्तुओं में निवेश करने से लाभ मिलेगा। लग्न पर आठवीं पूर्ण दृष्टि से शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में जिस कार्य को आरंभ करेंगे। उस कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।
14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में ननिहाल पक्ष का सुख एवं सहयोग प्राप्त होगा। पुरुषार्थ के द्वारा बाहरी स्थान से संबंध बनेंगे तथा आय में वृद्धि होगी।
3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में मकान आदि का सुख प्राप्त होगा। लंबी यात्रा, तीर्थ यात्रा का योग बन रहा है। यात्रा सुखदायी एवं लाभ प्रद रहेगी।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- तुला राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए सप्तमेश एवं द्वितीयेश मंगल की गोचर से पंचम भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में अकारण चिंता बनी रहेगी। संतान को भी शारीरिक कष्ट हो सकता है या संतान के कारण मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ेगा। पारिवारिक जीवन कलह रहेगा। दांपत्य जीवन में कटुता रहेगी। व्यवसाय से आय एवं संचित धन में वृद्धि हो सकती है। वाणी में कठोरता या वाणी दोष के कारण विद्या के क्षेत्र में असफलता की प्राप्ति हो सकती है। अतः इस अवधि में वाणी पर संयम रखें।

 4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में व्यवसाय में वृद्धि होगी और पुरषार्थ के द्वारा संचित धन में भी वृद्धि होगी परंतु संतान के लिए समय अनुकूल नहीं है।
14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में कुटुंब या अपने लोगों से कलह होगा। वाणी दोष के कारण रोजगार एवं धन हानि हो सकती है।
 3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। जिसके कारण इस अवधि में शत्रुओं में वृद्धि होगी। पुरषार्थ के अनुसार सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। अष्टम भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण आयु में वृद्धि होगी। परंतु शारीरिक कष्ट हो सकता है। आय स्थान पर सातवी पूर्ण दृष्टि से आय में परिश्रम के अनुसार वृद्धि होगी। बड़े भाई से वैचारिक मतभेद हो सकता है। व्यय भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण व्यय की अधिकता रहेगी। लंबी यात्रा से दूरी बनाकर रखें। यात्रा में अपव्यय एवं शारीरिक कष्ट होगा।
 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक-वृश्चिक राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए ष षष्ठेश एवं लग्नेश मंगल की गोचर से चतुर्थ भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में शत्रुओं में वृद्धि होगी। भूमि एवं मकान से संबंधित समस्या के कारण बंधुओं तथा स्वजनों से विरोध का सामना करना पड़ेगा। माता-पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि वाहन आदि का सुख प्राप्त होगा। स्थान परिवर्तन भी हो सकता है। पेट से संबंधित रोग, ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। सप्तम भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण जीवन साथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवन में कटुता आ सकती है। दशम भाव पर सातवी पूर्ण दृष्टि के परिणामस्वरुप राजकीय कार्य में सफलता प्राप्त होगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है।आय  स्थान पर आठवी पूर्ण दृष्टि के कारण आय में वृद्धि होगी।

 4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा।

14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में उदर विकार से कष्ट एवं समाज में मान सम्मान में कमी आ सकती है।

3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी। पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ेगा। जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है।

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु- धनु राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए पंचमेश एवं व्ययेश मंगल की गोचर से तीसरे भाव में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में साहस एवं पराक्रम में वृद्धि होगी। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। शत्रु पराजित होंगे। कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी तथा विभिन्न स्रोत से धन की प्राप्ति होगी। मान-सम्मान मिलेगा। शरीर स्वस्थ एवं मन प्रसन्न रहेगा।छठवे भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण ननिहाल पक्ष का सुख प्राप्त होगा। चाचा बुआ मामा एवं मोसी आदि से संबंध मधुर रहेंगे। शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करेंगे। भाग्य भाव पर सातवीं पूर्ण दृष्टि के कारण पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। इस अवधि में कठिन से कठिन कार्य में भी सिद्धि प्राप्त होगी। दशम भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि से राज्य के कार्य में सफलता प्राप्त होगी। प्रशासनिक क्षेत्र में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी तथा पदोन्नति का अवसर प्राप्त होगा।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में विद्या के क्षेत्र में मनोनुकूल सफलता प्राप्त होगी। संतान का सुख एवं सहयोग मिलेगा।
 14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में राजकीय कर्मचारियों से सहायता प्राप्त होगी। विवादित समस्याओं का समाधान होगा।
 3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में भूमि वाहन आदि की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा तथा मन प्रसन्न रहेगा।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- मकर राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए चतुर्थेश एवं आयेश मंगल की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में संचित धन में वृद्धि होगी।भूमि एवं भूमि से संबंधित वस्तुओं में निवेश करने से आय की प्राप्ति होगी। परंतु कुटुंब में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा। भूमि से संबंधित विवाद भी हो सकता है। जिसके कारण से धन की हानि होगी। दु रजनों के साथ संगति हो सकती है जो धन हानि का कारण बनेगी। वाणी में कठोरता रहेगी। पित्त की अधिकता के कारण एवं रक्त से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है। पंचम भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि से वाणी दोष के कारण विद्या में असफलता प्राप्त हो सकती है अतः इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखें। संतान से भी वैचारिक मतभेद हो सकता है। अष्टम भाव पर  सातवी पूर्ण दृष्टि के फलस्वरूप स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। नवम भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि से धर्म में रुचि नहीं रहेगी। पुरुषार्थ के द्वारा कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी।

4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में आय की प्राप्ति एवं संचित धन में वृद्धि होगी।
14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में सदा कठोर वचन का प्रयोग होगा जिसके कारण शत्रुता बढ़ेगी एवं विवाद के कारण धन हानि हो सकती है।
 3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा । इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में धूर्त एवं गलत लोगों की संगति के कारण अपव्यय  हो सकता है।
 

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-कुम्भ राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए तृतीऐश एवं दशमेश मंगल की गोचर से लग्न में उपस्थिति के परिणामस्वरूप इस अवधि में मन भीतर ही भीतर किसी कारण से शोकाकुल रहेगा या चिंता युक्त रहेगा। भाई बंधुओं से वियोग हो सकता है। रक्त से संबंधित रोग ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। उष्णता पैदा करने वाले रोग या हाथ पैर में जलन से शारीरिक पीड़ा हो सकती है। राजकीय एवं नौकरी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। दांपत्य जीवन में कटुता रहेगी। चतुर्थ भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि के कारण माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि मकान आदि के सुख में कमी आयेगी। सप्तम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण क्रोध की अधिकता रहेगी जिसके कारण व्यवसाय में हानि हो सकती है। अष्टम भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। ज्वर ,रक्त अल्पता एवं गुदा से संबंधित रोग से कष्ट हो सकता है।

 4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में नौकरी एवं सरकारी क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी परंतु जीवन साथी को ज्वर आदि से शारीरिक कष्ट हो सकता है। ससुराल पक्ष के हस्तक्षेप के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है।
 14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में मन अशांत रहेगा। वायु जनित रोग से कष्ट हो सकता है।
 3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में आय एवं धन के दृष्टिकोण से समय अनुकूल रहेगा, परंतु स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से समय अनुकूल नहीं रहेगा।
 

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन-  मीन राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए द्वितीय एवं नवमेश मंगल की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के परिणाम स्वरूप इस अवधि में धन की हानि होगी। व्यय की अधिकता रहेगी। भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त नहीं होगा फलस्वरूप कार्य में रुकावट आएगी। कुटुंब में विवाद के कारण मुकदमा आदि में व्यय हो सकता है। नेत्र विकार से शारीरिक कष्ट होगा। ज्वर एवं उष्णता से शारीरिक पीड़ा हो सकती है। शत्रु प्रभावशाली रहेंगे। तृतीय भाव पर चौथी पूर्ण दृष्टि से भाई-बहन को शारीरिक कष्ट एवं मित्रों से मनमुटाव हो सकता है। पराक्रम में हानि होगी। छठवें भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण शत्रुओं में वृद्धि होगी तथा शत्रुओं के कारण अपव्यय हो सकता है। सप्तम भाव पर आठवीं पूर्ण दृष्टि के कारण दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रहेगा। जीवनसाथी को ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है|

 4 मई से 14 मई तक मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इस अवधि में लंबी यात्रा में व्यय हो सकता है। बाहरी स्थान से धन की प्राप्ति हो सकती है।
 14 मई से 3 जून तक मंगल शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस अवधि में दूर व्यसन के कारण होगा मानहानि भी हो सकती है। गलत संगति से दूर रहने में भलाई है।
 3 जून से 18 जून तक मंगल पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र का स्वामी गुरु है। इस अवधि में स्वास्थ्य अनुकूल नहीं रहेगा। व्यवसाय एवं कार्यक्षेत्र में आशा के अनुकूल सफलता की प्राप्ति नहीं होगी।

 

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