गोत्र के कुलदेवता और छन्द

:-गोत्र के देवता और छन्द से अभिप्राय:-

प्रत्येक गोत्र के देवता और प्रत्येक गोत्र वाले को उनके वेद को एक विशेष छन्द से पढ़ा जाता है,आइये जाने देवता और छन्द से क्या अभिप्राय है-

देवता-प्रत्येक वेद या शाखा का अध्ययन करने वाले किसी विशेष देवता की आराधना करते है।और वहीं उनके कुलदेवता हैं।वेद चार हैं,और चारों वेद के ब्रह्म,विष्णु,शिव और इन्द्र क्रमशः देवता हैं।जैसे-ऋग्वेद के ब्रह्म,सामवेद के विष्णु,यजुर्वेद के शिव और अथर्व वेद के इन्द्र देवता हैं।वेदों का अध्ययन करने वाले यज्ञादि शुभ कर्मों में अपने देवता से संबन्धित मूल ऋचाओं से स्वस्तिवाचन करके कार्य को प्रारम्भ करते हैं।

छन्द-जिस गोत्र के लिए जिस वेद-उपवेद या उसकी शाखा का अध्ययन सुनिश्चित है,वह वेद जिस छन्द में गाया जाता है,वहीं उस गोत्र का छन्द कहलाता है।