कामना क्या है? - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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कामना क्या है?

:-कामना:-

पिछले लेख में हमें पढ़ा की कर्म क्या है। जैसा बताया जा चुका है कि मानव द्वारा जो भी क्रिया कामना और ममता के द्वारा होती है उसे कर्म कहते है और अधिक जानकारी हेतु आप हमारे लेख “कर्म क्या है” को पढ़ सकते हैं। मानव जब अपने कर्म के फलस्वरूप जो प्रतिफल की ईच्छा पूर्व में हीं करता है,इसी को कामना कहते हैं। वह कामना प्रत्येक मानव में लगभग समान होती है आइये जाने मनुष्य की कामना क्या होती है –

इस धरा धाम पर आये हुये प्रत्येक मनुष्य की चार प्रकार की चाह अर्थात कामना होती है –

  1. धन की
  2. धर्म
  3. भोग
  4. मोक्ष

धन:- प्रत्येक मनुष्य जो इस धरा धाम पर आया है उसको जीवन निर्वाह हेतु धन की अपेक्षा होती है,जिसे हम अर्थ भी कहते हैं धन के दो प्रकार होते हैं-स्थावर और जंगम। स्थावर धन में जमीन,मकान,सोना,चाँदी आदि होते हैं और जंगम में हाथी,घोडा,गाय,भैस ,वहां आदि आते हैं।

धर्म:- धन की प्राप्ति के बाद धर्म के प्रति भाव उत्पन्न होता है चाहे वह सकाम या निष्काम भाव से मान व्रत,दान,तीर्थ यात्रा आदि  करता है।

काम– धन की प्राप्ति सांसारिक सुखों की तरफ आकृष्ट करती है,यही सांसारिक सुख भोग “काम”कहलाता है। यह सांसारिक सुख जिसे काम कहते हैं आठ प्रकार के होते हैं-शब्द,स्पर्श,रूप,रस,गन्ध,मान,बड़ाई और विश्राम अर्थात आराम।

मोक्ष-अ पने इष्ट के प्रति प्रेम अर्थात भगवान के प्रति प्रेम उनके दर्शन की लालसा,आत्मसाक्षात्कार,तत्वज्ञान,कल्याण और उद्धार और मुक्ति का नाम मोक्ष है।

धन और धर्म एक दूसरे की पूरक हैं,शास्त्रों में बताया गया है कि,धन से हीं धर्म और धर्म से हीं धन की प्राप्ति होती है। दोनों हीं एक दूसरे के वृद्धि करने वाले हैं यदि इसी धर्म को केवल कामना की पूर्ति  के लिये किया जाय तो वह धर्म कामना पूर्ण करके समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार धन को कामना के प्रति लगाया जय तो वह धन कामनापूरक तक हीं सीमित हो जाता है।

कहने का अभिप्राय यह है कि धन और धर्म कामना की पूर्ति तक हीं सीमित नहीं किया जाना चाहिये। यह धन और उससे धर्म हमें भगवत चरण में प्रेम प्रदान करे भगवत दर्शन की अभिलाषा पूर्ण करे यह वास्तविक उद्देश्य होना चाहिये।क्यूँकि तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा ,

“साधन धाम मोच्छ कर द्वारा,पाई न जेहिं परलोक सँवारा।”

यह जीवन सत्कर्म करके धन और धर्म के द्वारा केवल और केवल प्रभु भजन करके अपना उद्धार करने को प्राप्त हुआ है।

अगले अंक में हम काम के जो आठ भेद बताये गये उसके सन्दर्भ में जानेंगे। ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ। …………….

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