मालाजाप की विधि – Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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मालाजाप की विधि

समस्यों के समाधान हेतु प्रभावशाली मालाजप पद्धति 
आज के जीवन में मन की एकाग्रता को पाना बहुत कठिन है | हिन्दू धर्म में भगवान की आराधना के लिए बहुत विधियाँ है| जिसमे मनुष्य यज्ञ,अर्चन,हवन,पूजा-पाठ,दान इत्यादि करता है| ईश्वर के समक्ष अपना तन और मन एकाग्र करने के लिए मंत्र जप सबसे प्रभावशाली है | मंत्र जप के उच्चारण में हमसे कोई भूल न हो इसलिए माला का प्रयोग किया जाता है| एक माला में 108 मनके होते है| माला जप से आप अपने अंदर की आध्यात्मिक शक्ति को जाग्रत करते हैं |

मालाजप की विधि
मालाजप को प्रारम्भ करने से पहले माँ धरती को प्रणाम करे, तत्पशत कुश या शुद्ध ऊनी आसन बिछाकर पालथी मारकर बैठे | माला जप के समय माला को दाहिने हाथ में लें | प्रसन्न मन के साथ मंत्र उच्चारण करें | मंत्रोच्चारण के समय माला पर ध्यान रखते हुए अंगूठे और अंगूठे से तीसरी ऊँगली जिसे मध्यमा कहते है|,इन दोनों से माला करनी चाहिये | तर्जनी ऊँगली (दूसरी ऊँगली) से भूल कर भी माला नहीं फेरनी चहिये| माला जपते समय हाथ को हृदय के पास स्पर्श करते हुए रखना चहिये| माला में जो भी सुमेरु होता है उसे लाघना नहीं करना चाहिये| यदि दूसरी माला फेरनी हो तो वापस माला बदल कर फेरे|
माला पूरी होने के बाद हमे ईश्वर से यह प्रार्थना अवश्य करनी चहिये की जप के दौरान यदि कोई भूल हुयी हो तो ईश्वर उसे माफ़ करें ,और हमारा कल्याण करें |

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