पितृशाप द्वारा सन्तान हानि योग - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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पितृशाप द्वारा सन्तान हानि योग

:-पितृशाप से सन्तान हानि योग :-

पिछले अंक में हम लोगों ने पढ़ा कि सर्प शाप से सन्तान की हानि सम्भव है आज उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए जानेगे कि  कुंडली में किन ग्रहों के योग से पितृ शाप से सन्तान का अभाव होता है,आइये जाने-

1-यदि व्यय भाव का स्वामी लग्न में हो और अष्टम भाव का स्वामी पंचम भाव में हो और दशमेश अष्टम भाव में हो –

2-पुत्रकारक ग्रह राहु से युक्त हो,छठें भाव का स्वामी पंचम भाव में और दशम भाव का स्वामी छठें भाव में हो-

3-लग्न पाप ग्रह युक्त हो और पंचमेश राहु युक्त हो शनि पंचम भाव में हो और सूर्य अष्टम भाव में हो-

4-लग्न और पंचम भाव में सूर्य मंगल और शनि हो अष्टम तथा द्वादश भाव में राहु और गुरु हो-

5-पुत्रकारक ग्रह पाप राशि में हो पंचम भाव तथा लग्न का स्वामी पाप युक्त हो तथा दशम भाव का स्वामी त्रिक स्थान में हो-

6-मंगल दशमेश हो और पंचमेश से युक्त हो लग्न पंचम और दशम भाव में पापग्रह हो-

7-दशमेश पंचम में हो और पंचमेश दशम भाव में हो तथा लग्न और पंचम और दशम भाव में पापग्रह हो-

8-लग्न और पंचम भाव में पापग्रह हो लग्नेश निर्बल होकर पंचम में हो और पंचमेश अस्त हो-

9-लग्न और पंचम भाव में पापग्रह हो गुरु सिंह राशि में हो तथा पंचमेश सूर्य के साथ रहे-

10-सूर्य पंचमेश होकर पापग्रह के साथ पांचवें या नवें स्थान में हो साथ हीं पापग्रह से घिरा हो और पाप ग्रह से देखा भी जाता हो।

उपर्युक्त योग से संतान हानि योग बनता है और  शास्त्र में पितृ शाप बताया गया है। जन्म कुंडली को किसी विद्वान ज्योतिषी से दिखाकर यदि सन्तान प्राप्ति में पितृशाप बाधक हो तो पितृ शाप से उद्धार हेतु ज्योतिषी से सलाह लेकर पितृशाप शान्ति कराकर सन्तान प्राप्ति करनी चाहिये।

परमात्मा सभी जीवों को सद्बुद्धि प्रदान कर अपनी चरण रज की सेवा का अवसर प्रदान करें-ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ। ………………………………………………….

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