ज्योतिष द्वारा आजीविका ( Career ) का निर्धारण - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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ज्योतिष द्वारा आजीविका ( Career ) का निर्धारण

ज्योतिष शास्त्र हमारे ऋषियों की अद्भुत देन है।  ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जातक यह आसानी से जान सकता  है की उसको किस क्षेत्र में प्रयासरत रहना चाहिए जिससे की उसको मनोकुल सफलता मिले।  आइये इस लेख में हम आपको ये बताते है की ज्योतिष द्वारा किस प्रकार से जातक के संभावित व्यवसाय या  आजीविका का निर्धारण कैसे करते है ?

आपने हमारे  प्रकाशित लेख “जन्मांग के द्वादश भाव से विचारणीय बातें” में पढ़ा होगा की कुण्डली के दशम भाव से मुख्यतः कर्म का विवेचन किया जाता है, इसके अलावा पिता का काम, रंग, वृत्ति, गुण, स्वभाव, आयु, नौकरी, व्यापार, पिता का सुख, कर्म सिद्धि, अनुशासन, पद-लाभ, विरासत, विदेश प्रवास, उत्थान-पतन एवं स्वप्न का विचार किया जाता है। अर्थात यदि आपका की कुंडली में दसवां भाव प्रबल है तो आपको आपके करियर में उत्तम  स्थिति प्राप्त होगी  एवं आपको यश की प्राप्ति।  आइये जाने की विभिन्न ग्रहो की दसवे स्थान में उपस्थिति आपके करियर आदि को किस प्रकार से प्रभावित करती है।

सूर्य :-

जिन जातको की कुंडली में सूर्य दशम स्थान में है हो , वह अपने व्यवसाय अथवा कैरियर के प्रति बहुत ही विचारशील होते है और ऐसे जातक अपने करियर में अच्छे पद को प्राप्त करते है।  जातक को उसके जीवन में काफी प्रसिद्धि प्राप्त  होती है , और ऐसे जातक समाज में बहुत लोक प्रिय होते है।

चन्द्रमा :-

जिन जातको की कुंडली में चन्द्रमा  दशम स्थान में है हो , वह अपने व्यवसाय अथवा कैरियर में  काफी भाग्यशाली होते है।  ऐसे जातक  कम उम्र में ही अपने व्यवसाय के द्वारा प्रसिद्धि एवं सफलता प्राप्त करते है। वह अपने काम को काफी संजीदगी से करते है। 10 वें घर में चंद्रमा का स्थान व्यक्ति को उसके पेशे से प्यार करने और प्रयासों में ईमानदार और मेहनती होने के लिए प्रेरित करता है।

मंगल :-

जिन जातकों की कुंडली में मंगल  दशम स्थान में है हो , वह अपने कार्य में दक्ष होते है।  उनके कार्य में उनकी दक्षता उन्हें जीवन में सफलता दिलाती है। ऐसे ज्यादा थोड़ा ज्यादा महत्वाकांक्षी होते है।  दशम स्थान का मंगल जातक के शासक बनने के लिए प्रेरित करता है।

बुध

जिन जातकों की कुंडली में बुध दशम स्थान में हो , ऐसे व्यक्ति आजीविका के क्षेत्र में सफलता प्राप्त  है तथा उनको आजीविका क्षेत्र में प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है। ऐसे जातको की धन अर्जित करने की क्षमता पर तनिक भी संदेह नहीं किया जा सकता। यह  मैं बहुत दक्ष होते है। बुध गृह संचार , वाणिज्य , व्यापार आदि का कारक है। अतःएव बुध की 10 स्थान में उपस्थिति जातक को एक सफल व्यवसायी बना सकती है।

गुरु

जिन जातकों की कुंडली में गुरु दशम भाव में होता है, ऐसे जातक उत्तम आचरण करने वाले होते है| बृहस्पति सौभाग्य प्रदान करता है| गुरु जिन जातकों की कुंडली में दशम भाव पर होते है वे ज्योतिष, प्रोफेसर , उपदेशक, इतिहास पुराणादि के पठन-पाठन से धर्मोपदेश, धार्मिक संस्था का निरीक्षण और जज आदि से सम्बंधित कार्य कर अपनी आजीविका अर्जित करते है|  यह जातक बैंक में भी कार्यरत हो सकते है| बृहस्पति जिन जातकों की कुंडली में बलवान हो वह ब्याज द्वारा भी धन अर्जित करने में सक्षम होते है|

शुक्र

जिन जातकों की कुंडली में शुक्र  दशम स्थान में होते है ,ऐसे जातक अपने मित्रों और आस पास के लोगो में हर्षोउल्लास उत्पन्न करते है | ऐसे जातक अदाकार , कलाकार ,संगीतकार , मंच कलाकार आदि की तरह अपनी जीविका अर्जित करते है। इन जातको को समाज में प्रतिष्ठता प्राप्त होती है और वो आसानी से धन अर्जित करते है|

शनि

जिन जातकों की कुडली में शनि दशम स्थान में होता है, ऐसे जातक परिश्रमी, नेतृत्व क्षमता रखने वाले तथा महत्वाकांक्षी होते है| दशम स्थान पर शनि जीवन में कई उतार चढाव भी लाता है| शनि नेतृत्व की प्रवृत्ति और किसी भी  पेशे के लिए एक उच्च अनुशासित दृष्टिकोण देता है। ऐसे जातक निर्माण , खनन, लोहा, कोयला, स्टील, क्रय विक्रय मजदूरी अथवा मजदूरो के ठेकेदार, वकालत  तथा बिजली से सम्बन्धित उपकरणों का व्ययसाय कर अपनी आजीविका अर्जित करते है|

 

 

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