शनि की साढ़ेसाती और ढैया का शरीर में प्रभाव – Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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शनि की साढ़ेसाती और ढैया का शरीर में प्रभाव

:- शनि की साढ़ेसाती और ढैया विचार :-

शनि यदि जन्म राशि से 12,1और 2 अर्थात बारहवें,प्रथम और द्वितीय स्थान में हो तो शनि की साढ़ेसाती होती है। शनि एक राशि में 30 महीनें अर्थात ढाई वर्ष तक रहता है इस प्रकार वह जन्म राशि से बारहवें स्थान में ढाई वर्ष ,राशि में ढाई वर्ष और राशि से द्वितीय स्थान में ढाई वर्ष तक रहता है। इस प्रकार कुल मिलकर यह अवधि साढ़े सात वर्ष की होती है,जिसे शनि की साढ़े साती के नाम से जाना जाता है। सामान्यतः यह अवधि अर्थात शनि की साढ़े साती जातक के लिए कष्टकारी हीं होती है। जैसा कि शास्त्रों में भी वर्णित है-

“द्वादशे जन्मगे राशौ द्वितीये च शनैश्चरः ,सार्द्धानि सप्तवर्षाणि तदा दुःखैर्युतो भवेत्।”  

इसी प्रकार शनि की ढैया के विषय में भी शास्त्रों में  बताया गया है कि,जन्म राशि से शनि चतुर्थ स्थान और अष्टम स्थान में हो तो शनि की ढैया होती है ,ढैया से हीं स्पष्ट है कि यह ढाई वर्ष की अवधि तक रहती है। शनि की साढ़ेसाती की तरह ढैया भी जातक के लिये कष्टकारी हीं होती है।

अब शनि की साढ़ेसाती जातक के कौन-कौन से स्थान में रहती है इसका विचार करते हुये बताया गया कि शनि यदि गोचर से बारहवें स्थान पर हो तो सिर पर प्रभाव डालता है। और यदि जन्म राशि में हो तो ह्रदय पर प्रभाव डालता है और यदि जन्म राशि से द्वितीय स्थान पर हो तो जातक के पैर पर अपना प्रभाव डालती है।

उपर्युक्त जानकारी के होते हुए भी किसी प्रबुद्ध ज्योतिषी के पास जाकर अपनी कुण्डली के सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी प्राप्त करके शनि के जप-दान आदि की क्रिया द्वारा शनि की शान्ति करा लेनी चाहिये।

प्रभु आप सभी लोगों को अपनी कृपा से आपकी समस्त इच्छाओं को पूर्ण करके अपनी भक्ति प्रदान करें। ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ। …………………..

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