काम और उसके प्रकार - Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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काम और उसके प्रकार

:-काम:-

धन को धर्म शास्त्र के अनुसार सदुपयोग करके धन की सार्थकता प्राप्त की जाती है। आज के वर्तमान परिवेश में धन को सांसारिक सुखों जिसको हम “काम” कहते हैं उसकी प्रतिपूर्ति के प्रयास में हम लोग लगे रहते हैं,अर्थात सांसारिक सुखो के भोग को हीं काम कहते हैं।

काम के प्रकार:-जैसा की पिछले अंक में भी बताया गया है कि काम आठ प्रकार के होते है –

  1. शब्द
  2. स्पर्श
  3. रुप
  4. रस
  5. गन्ध
  6. मान
  7. बड़ाई
  8. विश्राम अर्थात आराम।

आइये इन आठों के सन्दर्भ में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करें-

शब्द- शब्द जीव को एक विशेष प्रकार का सुख प्रदान कराते हैं,शब्द भी वर्णात्मक और ध्वन्यात्मक होते हैं।मधुर वचन को सुनकर सुख की अनुभूति और संगीत रुपी ध्वन्यात्मक शब्द को सुख की प्राप्ति होती है,यह शब्द सुख की श्रेणी में आता है।

स्पर्श- स्पर्श सुख का आभास हमें त्वचा के संयोग से होता है परस्पर मेल से,शरद ऋतु में गरम के स्पर्श से जो सुख प्राप्त होता है वह स्पर्श सुख कहलाता है।

रूप- रूप का सुख प्रदान करने का माध्यम हमारे नेत्र हैं.नेत्रों से मनुष्य के विचारों के अनुसार चित्र या चलचित्रों को देखकर जो सुख की अनुभूति होती है उसे रूप का सुख कहते हैं।

रस– रस का सुख हमारे जिह्वा के माध्यम से प्राप्त होता है,मीठा तीखा  खट्टा या नमकीन आदि को चखने के बाद जो सुख प्राप्त होता है वह रास का सुख कहा जाता है।

गन्ध- गन्ध का सुख प्राप्त करने में हमारी घ्राणेन्द्रियाँ सहायक हैं जैसे किसी सुगंध और दुर्गन्ध आदि से जो सुख प्राप्त होता है वह गन्ध का सुख कहा जाता है।

मान- स्वयं के स्वागत सत्कार से जो सुख प्राप्त होता है वह मान का सुख कहा जाता है।

बड़ाई- स्वयं की प्रशंसा आदि से जिस सुख की प्राप्ति होती है वह बड़ाई के सुख की श्रेणी में आता है।

विश्राम या आराम-शारीरिक श्रम या शरीर से किसी प्रकार का  श्रम न करने से जिस सुख की प्राप्ति होती है वह आराम का सुख है।

इस प्रकार काम अर्थात सांसारिक सुखों के भोग के जो आठ भाग है वह मानव के कर्मानुसार प्राप्त होते हैं।

प्रभु अपनी कृपा से हम मतिमंद लोगों की बुद्धि शुद्ध करके हमें सत्कर्मों की तरफ प्रेरित करें-ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ। …

 

कामना क्या है?

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