बसन्त पंचमी मुहूर्त एवं सरस्वती पूजा विशेष लेख – Vedic JyotishKrti Book Service Appointment
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बसन्त पंचमी मुहूर्त एवं सरस्वती पूजा विशेष लेख

:-बसन्त पंचमी पर सरस्वती जी की पूजा क्यूँ :-

भारत वर्ष एक धर्म प्रधान देश है।यहाँ विविध धर्मों के अवलम्बियों का समावेश है।जिसमे हिन्दू धर्म वाले भी अपने परम्परागत त्योहारों उत्सवों को धूमधाम से आयोजित और पूजन करते हैं।माघ मास हिन्दू धर्म का एक पवित्र माह है,जिसमें शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसन्त पंचमी की संज्ञा प्रदान की गई है।माघ शुक्लपक्ष की पंचमी को बसन्त पंचमी का नाम इसलिए दिया गया क्यूंकि इस दिन से बसन्त ऋतु का आरम्भ होता है।इस बार बसन्त पंचमी दिनाँक 30 जनवरी 2020  दिन गुरुवार को है।

भारत में छः प्रकार की ऋतुयें पायी जाती है,परन्तु इन छः ऋतुओं में बसन्त ऋतु का अपना स्थान है और इसे ऋतुओं का राजा कहा जाता है।इस दौरान मौसम सुहाना हो जाता है और पेड़-पौधों में नये फल-फूल पल्लवित होने लगते हैं जैसे-पलाश के लाल-लाल फूल,आम के पेड़ो पर आए हुए बौर,सरसों के पेड़ों में खिले हुए पीले-पीले फूल मानव के जीवन में नयी चेतना का संचार करते है।बसन्त को प्रेम के देवता काम का मित्रा माना जाता है इसलिए कहीं-कहीं कामदेव की भी पूजा होती है।

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन वाणी की देवी सरस्वती का जन्म हुआ था।कहते हैं कि ब्रह्मा को सृष्टि की रचना के बाद भी जब कुछ कमी का आभास हुआ तो उन्होने अपने कमंडल से जल लेकर जब संकल्प लिया तो एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई जो चार हाथों वाली थी।उनके एक हाथ में पुस्तक एक हाथ में माला एक हाथ में वीणा और एक हाथ वर मुद्रा के रूप में था।तब ब्रह्मा ने उस प्रकट हुई देवी से वीणा बजने का अनुरोध किया,उनके द्वारा बजाए गए वीणा से संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी की प्राप्ति हुयी।

वीणा बजाने से जीव-जन्तुओं में हुए वाणी के संचार के कारण इन देवी का एक नाम वागीश्वरी ब्रह्मा जी द्वारा प्रदान किया गया।और वाणी की देवी को अन्य नाम भगवती,वीणावादिनी,शारदा,वाग्देवी आदि-आदि नामों से जाना जाने लगा।

ब्रह्मा जी ने बसन्त पंचमी के दिन हीं देवी सरस्वती की उत्पत्ति की थी,इसलिए तब से हीं बसन्त पंचमी को देवी सरस्वती के पूजन दिवस के रूप में आयोजित किया जाने लगा।

माता सरस्वती मानव को निर्मल बुद्धि प्रदान कर उनके जीवन में नयी ऊर्जा का संचार करें और समस्त जीवों का जीवन वीणा के मधुर ध्वनि की मधुरता का रसपान करने का आशीर्वाद दें।

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